इंदौर में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डीपफेक तकनीक के इस्तेमाल से ठगी का मध्य प्रदेश का पहला मामला सामने आया है। ठगों ने घर से नाराज होकर निकले 10वीं के एक छात्र की फोटो का इस्तेमाल कर उसका फर्जी किडनैपिंग वीडियो बनाया और मां से 1 लाख 2 हजार रुपए ऐंठ लिए। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि छात्र 2 फरवरी 2026 को पिता की डांट से नाराज होकर सांवरिया सेठ मंदिर चला गया था। परिजनों ने उसकी तलाश के लिए सोशल मीडिया पर फोटो और मोबाइल नंबर साझा किए थे। इसी का फायदा उठाकर ठगों ने बच्चे की फोटो को डीपफेक वीडियो में बदल दिया, जिसमें वह चाकू की नोक पर प्रताड़ित होता दिख रहा था। डरी हुई मां ने घबराहट में ठगों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड पर तुरंत पैसे ट्रांसफर कर दिए। ठगी का खुलासा तब हुआ जब अगले दिन बेटा सुरक्षित मिल गया और उसने किडनैपिंग से इनकार किया। एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के अनुसार, ठग पैनिक स्थिति का फायदा उठाकर पहले से रिकॉर्डेड डीपफेक वीडियो व्हाट्सएप स्क्रीन पर प्ले कर देते हैं। क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है। भास्कर नॉलेज : ऐसे बचें ठगी से अपडेट हो रहे हैं साइबर अपराधी : कुछ समय पहले तक ठग पुलिस अधिकारी बनकर बच्चों के रेप केस या ड्रग्स में फंसने का डर दिखाकर पैसे वसूलते थे। अब वे डीपफेक तकनीक के माध्यम से पीड़ित को विजुअल सबूत (वीडियो) दिखाकर डरा रहे हैं। सोशल मीडिया पर निजी जानकारी और फोटो सार्वजनिक करना इस तरह के अपराधों को सीधा न्योता देना है।


