केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के लखनऊ परिसर में ‘नारी से नारायणी’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ज्ञान भारती (राष्ट्र सेविका समिति) के सहयोग से किया गया।इस सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें लगभग 300 महिलाओं ने भाग लिया। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो. सर्वनारायण झा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि डॉ. जया पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। मुख्य वक्ता शशि ने भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति और संस्कार का आधार बताया। विशिष्ट अतिथि पूजा अग्रवाल सहित कई शिक्षाविद और समाजसेवी भी मौजूद थे। आठ विशेषज्ञों के साथ हुई पैनल चर्चा राज्य संयोजिका डॉ. अनु शर्मा ने ‘महिला विमर्श का भारतीय नैरेटिव’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा है। सम्मेलन में विधि, चिकित्सा, शिक्षा, प्राध्यापक वर्ग, छात्राओं और गृहिणियों सहित विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं ने हिस्सा लिया। आठ विशेषज्ञों के साथ हुई पैनल चर्चा में भारतीय दृष्टिकोण से महिला चेतना पर गहन विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने आत्मविश्वास, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी को नारी के विकास का आधार बताया। डॉ. अल्का पांडेय ने रेखांकित किया कि नारी में सृजन और परिवर्तन की अद्भुत क्षमता है, जो समाज को नई दिशा प्रदान करती है। नारी शक्ति का प्रतीक है कार्यक्रम के दौरान समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्साहपूर्ण बनाया। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. झा ने कहा कि नारी शक्ति का प्रतीक है और उसके सम्मान से ही समाज मजबूत बनता है। समापन सत्र में संयोजिका डॉ. कविता बिसारिया ने नारी के मूल्यों को प्राथमिकता देने की बात कही।


