गयाजी में आज आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना अपनी धर्मपत्नी के साथ गयाजी पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने भगवान विष्णु की चरणस्थली विष्णुपद मंदिर में माथा टेका और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में उन्होंने अभिषेक किया। तुलसी को जल अर्पित किए। बता दें कि भगवान विष्णु को तुलसी जल सबसे प्रिय है। तीर्थ पुरोहितों से मंदिर के इतिहास और उसकी धार्मिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की ओर से उन्हें भगवान विष्णु का पवित्र चरण चिन्ह भेंट किया गया। इसके अलावा राज्यपाल सपत्नीक बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर पहुंचे। यहां बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से पारंपरिक खादा ओढ़ाकर उनका स्वागत किया गया। मंदिर के गर्भगृह में उन्होंने श्रद्धा के साथ पूजा की। पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे भी ध्यान लगाया और प्रार्थना की। भिक्षुओं ने सूत्रपाठ किया पूरे माहौल में आध्यात्मिक शांति साफ महसूस हो रही थी। भिक्षुओं ने सूत्रपाठ किया। राज्यपाल और उनकी धर्मपत्नी को आशीर्वाद दिया गया। राज्यपाल ने विजिटर बुक में अपने अनुभव भी लिखे। उन्होंने कहा कि बोधगया आना उनके लिए बेहद खास पल है। भगवान बुद्ध के दर्शन की इच्छा लंबे समय से थी। आज पूरी हुई। उन्होंने लिखा कि इस पवित्र स्थल की दिव्यता से वे अभिभूत हैं और भगवान बुद्ध से विश्व शांति की कामना की। कार्यक्रम के अंत में बीटीएमसी की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह दिए गए। इसमें महाबोधि मंदिर की प्रतिकृति, बोधि वृक्ष का पत्ता, बौद्ध कला से जुड़ी पुस्तकें और कैलेंडर शामिल थे। प्रस्थान के दौरान राज्यपाल ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की व्यवस्था और प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां की व्यवस्था अनुकरणीय है।
पूरे दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के सदस्य और भिक्षु मौजूद रहे। गयाजी में आज आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना अपनी धर्मपत्नी के साथ गयाजी पहुंचे। सबसे पहले उन्होंने भगवान विष्णु की चरणस्थली विष्णुपद मंदिर में माथा टेका और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में उन्होंने अभिषेक किया। तुलसी को जल अर्पित किए। बता दें कि भगवान विष्णु को तुलसी जल सबसे प्रिय है। तीर्थ पुरोहितों से मंदिर के इतिहास और उसकी धार्मिक महत्ता के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति की ओर से उन्हें भगवान विष्णु का पवित्र चरण चिन्ह भेंट किया गया। इसके अलावा राज्यपाल सपत्नीक बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर पहुंचे। यहां बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से पारंपरिक खादा ओढ़ाकर उनका स्वागत किया गया। मंदिर के गर्भगृह में उन्होंने श्रद्धा के साथ पूजा की। पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे भी ध्यान लगाया और प्रार्थना की। भिक्षुओं ने सूत्रपाठ किया पूरे माहौल में आध्यात्मिक शांति साफ महसूस हो रही थी। भिक्षुओं ने सूत्रपाठ किया। राज्यपाल और उनकी धर्मपत्नी को आशीर्वाद दिया गया। राज्यपाल ने विजिटर बुक में अपने अनुभव भी लिखे। उन्होंने कहा कि बोधगया आना उनके लिए बेहद खास पल है। भगवान बुद्ध के दर्शन की इच्छा लंबे समय से थी। आज पूरी हुई। उन्होंने लिखा कि इस पवित्र स्थल की दिव्यता से वे अभिभूत हैं और भगवान बुद्ध से विश्व शांति की कामना की। कार्यक्रम के अंत में बीटीएमसी की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह दिए गए। इसमें महाबोधि मंदिर की प्रतिकृति, बोधि वृक्ष का पत्ता, बौद्ध कला से जुड़ी पुस्तकें और कैलेंडर शामिल थे। प्रस्थान के दौरान राज्यपाल ने बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति की व्यवस्था और प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां की व्यवस्था अनुकरणीय है।
पूरे दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर समिति के सदस्य और भिक्षु मौजूद रहे।


