Jaipur News: गुलाबी नगरी के इतिहास और आस्था का केंद्र गलता पहाड़ एक बार फिर ऐतिहासिक पल का गवाह बना। करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद इस बार भानु सप्तमी और सूर्य रथ सप्तमी का अद्भुत संयोग एक ही दिन बन रहा है। माघ शुक्ल पक्ष की इस सप्तमी को भगवान सूर्यनारायण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे शहर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर गलता पहाड़ी पर बने सूर्य मंदिर से निकलकर भगवान सूर्य देव ने शहर में भ्रमण किया। इस बीच आपको जयपुर के सूर्य मंदिर की कुछ खास जानकारियां देते हैं। शहर की इस जगह पर सूर्य देव की पहली किरण पड़ती है।
अरावली की चोटी पर सूर्यदेव का किले, जैसा दरबार
जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह के दौर में साल 1734-35 में इस भव्य सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। अरावली की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि वास्तुकला का भी अद्भुत नमूना है। इसकी बनावट किसी छोटे किले जैसी लगती है, जहाँ राजपूत और मुगल शैली का संगम दिखाई देता है।
यहाँ क्यों पड़ती है पहली किरण
इस मंदिर की सबसे चमत्कारी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है। पूरी तरह पूर्व दिशा की ओर मुख होने के कारण, जयपुर शहर में सूर्य की सबसे पहली और आखिरी 90 डिग्री की किरण सीधे इसी मंदिर के गर्भगृह में पड़ती है। सूर्यवंशी जयपुर राजपरिवार के आराध्य देव होने के कारण यहाँ अश्वमेध यज्ञ के समय सूर्य देव की प्रतिमा स्थापित की गई थी, जहाँ वे अपनी पत्नी रोहिणी और सात घोड़ों के रथ पर सवार हैं।
शाही अंदाज में निकलेगी सूर्य रथयात्रा
रियासतकाल से चली आ रही परंपरा के अनुसार रविवार सुबह 9 बजे गलता घाटी स्थित इस प्राचीन मंदिर से भगवान सूर्य का रथ नगर भ्रमण पर निकला। महंत श्याम सुंदर शर्मा ने बताया कि यह यात्रा शहर के प्रमुख बाजारों से होती हुई छोटी चौपड़ पहुँचेगी, जहाँ भव्य महाआरती होगी।
मौसम और सेहत का खास कनेक्शन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह तिथि केवल पूजा.पाठ तक सीमित नहीं है। इस दिन से सूर्यदेव शिशिर ऋतु को विदा कर वसंत ऋतु की ओर कदम बढ़ाते हैं। मान्यता है कि इस दिन सूर्योपासना करने से आरोग्य, अच्छी सेहत और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।


