लखनऊ स्थित माधव सेवा आश्रम में शनिवार को अग्निहोत्र और पर्यावरण शुद्धि को लेकर एक विशेष सत्संग का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण और सुखमय जीवन के लिए अग्निहोत्र को एक प्रभावी उपाय बताया। वक्ताओं ने जोर दिया कि यदि मनुष्य पर्यावरण को सकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करेगा, तो पर्यावरण स्वयं मनुष्य को प्रभावित करेगा। उन्होंने बताया कि नियमित अग्निहोत्र से वातावरण शुद्ध होता है और जीवन के कई नकारात्मक प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाते हैं। अग्निहोत्र अपनाने से लोगों के जीवन में परिवर्तन भोपाल स्थित माधव आश्रम से आईं मुख्य अतिथि नलिनी माधव ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अग्निहोत्र अपनाने से कई लोगों के जीवन में अद्भुत सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने भगवान परशुराम के संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें अग्निहोत्र का कोई विकल्प नहीं बताया गया है।नलिनी माधव ने यह भी बताया कि गजानन महाराज द्वारा भोपाल के माधव आश्रम से शुरू की गई अग्निहोत्र परंपरा आज भी लगातार आगे बढ़ रही है। चिकित्सा उपचार के साथ अग्निहोत्र की शक्ति को स्वयं महसूस किया जर्मनी से आए मुख्य वक्ता डॉ. उलरिच ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने चिकित्सा उपचार के साथ अग्निहोत्र की शक्ति को स्वयं महसूस किया है। उनके अनुसार, अग्निहोत्र से मरीजों को मानसिक शांति मिलती है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने की सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होती है।सत्संग के समापन के बाद अग्निहोत्र के प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई। ढलते सूर्य के समय सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से अग्निहोत्र की आहुति दी।


