नालंदा में जल संकट की आहट:भीषण गर्मी से पहले वाटर लेवल गिरा, डेंजर जोन’ में 4 ब्लॉक; कई इलाकों में नल-जल योजना फेल

नालंदा में जल संकट की आहट:भीषण गर्मी से पहले वाटर लेवल गिरा, डेंजर जोन’ में 4 ब्लॉक; कई इलाकों में नल-जल योजना फेल

नालंदा जिले में भीषण गर्मी से पहले भू-जलस्तर में गिरावट ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह है कि मई और जून की तपिश आने से पहले ही जिले के एकंगरसराय और परवलपुर प्रखंड ‘डेंजर जोन’ की श्रेणी में आ गए हैं। चार प्रखंडों की कुल 32 पंचायतों में स्थिति भयावह होती जा रही है, जहां जलस्तर 50 फीट या उससे भी नीचे चला गया है। गिरते जलस्तर के कारण ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। कई जगहों पर नल-जल योजना की बोरिंग भी फेल हो रही है। जिले के भौगोलिक जलस्तर के विश्लेषण से पता चलता है कि पूर्वी भाग के 11 प्रखंडों में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, जहां औसत जलस्तर 36.06 फीट दर्ज किया गया है। इसके विपरीत, पश्चिमी भाग के आठ प्रखंडों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। यहां वर्तमान में औसत जलस्तर 41.0 फीट है, जिसमें दिसंबर की तुलना में करीब तीन इंच की गिरावट आई है। सबसे चिंताजनक स्थिति इस्लामपुर प्रखंड की सकरी पंचायत स्थित हरसेनी गांव की है, जहां पानी 57.7 फीट की गहराई तक चला गया है। इसी तरह इस्लामपुर के बौरीडीह और परवलपुर के मई क्षेत्र में भी जलस्तर 57.2 फीट तक खिसक चुका है। आंकड़ों के अनुसार, एकंगरसराय की 18 में से 17 पंचायतें और परवलपुर की सभी छह पंचायतें अब डेंजर जोन का हिस्सा बन चुकी है। समस्या गंभीर हो सकती है जल संकट का एक बड़ा कारण जिले की नदियों का सूखना भी है। जिले से होकर गुजरने वाली करीब 40 छोटी-बड़ी नदियां पूरी तरह बरसाती है, जिनमें पानी का ठहराव नहीं होने के कारण वाटर रिचार्ज की प्रक्रिया बाधित हो रही है। पंचाने, जिरायन और लोकाइन जैसी प्रमुख नदियों के सूखने और केवल कुछ गड्ढों में पानी सिमट जाने से भू-गर्भ जल को पुनर्जीवित होने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता राघवेंद्र कुमार का मानना है कि नदियों में पानी न रुकने से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जो आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए एकंगरसराय की पारथू, कोसियावां, तेल्हाड़ा, और औंगारी जैसी सत्रह पंचायतों समेत इस्लामपुर की सात, परवलपुर की सभी छह और बेन प्रखंड की दो पंचायतों को अति संवेदनशील माना जा रहा है। अगर समय रहते जल संरक्षण और वैकल्पिक उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मई और जून की तपती गर्मी में जिले के एक बड़े हिस्से में पानी के लिए हाहाकार मचना तय माना जा रहा है। नालंदा जिले में भीषण गर्मी से पहले भू-जलस्तर में गिरावट ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। हालात यह है कि मई और जून की तपिश आने से पहले ही जिले के एकंगरसराय और परवलपुर प्रखंड ‘डेंजर जोन’ की श्रेणी में आ गए हैं। चार प्रखंडों की कुल 32 पंचायतों में स्थिति भयावह होती जा रही है, जहां जलस्तर 50 फीट या उससे भी नीचे चला गया है। गिरते जलस्तर के कारण ग्रामीण इलाकों में हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। कई जगहों पर नल-जल योजना की बोरिंग भी फेल हो रही है। जिले के भौगोलिक जलस्तर के विश्लेषण से पता चलता है कि पूर्वी भाग के 11 प्रखंडों में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, जहां औसत जलस्तर 36.06 फीट दर्ज किया गया है। इसके विपरीत, पश्चिमी भाग के आठ प्रखंडों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। यहां वर्तमान में औसत जलस्तर 41.0 फीट है, जिसमें दिसंबर की तुलना में करीब तीन इंच की गिरावट आई है। सबसे चिंताजनक स्थिति इस्लामपुर प्रखंड की सकरी पंचायत स्थित हरसेनी गांव की है, जहां पानी 57.7 फीट की गहराई तक चला गया है। इसी तरह इस्लामपुर के बौरीडीह और परवलपुर के मई क्षेत्र में भी जलस्तर 57.2 फीट तक खिसक चुका है। आंकड़ों के अनुसार, एकंगरसराय की 18 में से 17 पंचायतें और परवलपुर की सभी छह पंचायतें अब डेंजर जोन का हिस्सा बन चुकी है। समस्या गंभीर हो सकती है जल संकट का एक बड़ा कारण जिले की नदियों का सूखना भी है। जिले से होकर गुजरने वाली करीब 40 छोटी-बड़ी नदियां पूरी तरह बरसाती है, जिनमें पानी का ठहराव नहीं होने के कारण वाटर रिचार्ज की प्रक्रिया बाधित हो रही है। पंचाने, जिरायन और लोकाइन जैसी प्रमुख नदियों के सूखने और केवल कुछ गड्ढों में पानी सिमट जाने से भू-गर्भ जल को पुनर्जीवित होने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता राघवेंद्र कुमार का मानना है कि नदियों में पानी न रुकने से जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जो आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए एकंगरसराय की पारथू, कोसियावां, तेल्हाड़ा, और औंगारी जैसी सत्रह पंचायतों समेत इस्लामपुर की सात, परवलपुर की सभी छह और बेन प्रखंड की दो पंचायतों को अति संवेदनशील माना जा रहा है। अगर समय रहते जल संरक्षण और वैकल्पिक उपायों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मई और जून की तपती गर्मी में जिले के एक बड़े हिस्से में पानी के लिए हाहाकार मचना तय माना जा रहा है।  

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