रिश्तों की ‘अर्थी’: 15 बीघा जमीन के लिए बेटों ने रोकी पिता की मुखाग्नि, पुलिस के आने के बाद हुआ संस्कार

रिश्तों की ‘अर्थी’: 15 बीघा जमीन के लिए बेटों ने रोकी पिता की मुखाग्नि, पुलिस के आने के बाद हुआ संस्कार

झांसी : झांसी के मऊरानीपुर से एक दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद श्मशान घाट पर उस वक्त तमाशा खड़ा हो गया, जब उनके दो परिवारों के बेटे जमीन के हक के लिए आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि चिता सजने के बाद मुखाग्नि की प्रक्रिया रोकनी पड़ी। घंटों चले हाई-वोल्टेज ड्रामे और पुलिस की दखल के बाद आखिरकार जमीन का ‘लिखित’ फैसला हुआ, तब कहीं जाकर बुजुर्ग का अंतिम संस्कार हो सका।

पहली और दूसरी पत्नी के बेटों में ठनी

मामला बड़ागांव के जगनपुरा गांव का है। 80 वर्षीय बूठे अहिरवार की मौत के बाद उनके दो परिवारों के बीच बरसों से दबा विवाद श्मशान की दहलीज पर फूट पड़ा। मृतक की पहली पत्नी का बेटा संजीव और दूसरी पत्नी का बेटा मुकेश करीब 14-15 बीघा जमीन के बंटवारे को लेकर अड़ गए।

पहली पत्नी के बेटे संजीव ने साफ कह दिया कि जब तक जमीन का अधिकार स्पष्ट नहीं होता, अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे। मामला बिगड़ता देख लोगों ने डायल 112 को सूचना देकर पुलिस को बुलाया। मौके पर पहुंची पुलिस ने मोर्चा संभाला और मामले में समझौता करवाया।

35 साल का साथ बनाम हक की लड़ाई

मृतक पिछले करीब 35 वर्षों से अपनी दूसरी पत्नी और उनके बेटों के साथ रह रहे थे। दूसरी पत्नी के बेटे मुकेश का तर्क था कि पिता लंबे समय से बीमार थे और उन्होंने ही उनकी सेवा की। वहीं, पहली पत्नी के परिवार का कहना था कि पिता के अलग रहने के कारण जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं थी, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।

पुलिस की मौजूदगी में हुआ समझौता

श्मशान घाट पर तनावपूर्ण माहौल देख पुलिस और गांव के प्रबुद्ध जनों ने मोर्चा संभाला। घंटों की मान-मनुहार और कानूनी पेचीदगियों के बीच दोनों पक्षों में जमीन को लेकर लिखित समझौता कराया गया। समझौते के कागज पर हस्ताक्षर होने के बाद ही संजीव और मुकेश ने मिलकर पिता के शव को कंधा दिया और रीति-रिवाज के साथ अंतिम विदाई दी। मौके पर संस्कार के दौरान पुलिस मौजूद रही। इस घटना को लेकर लोग तरह तरह की चर्चाएं कर रहे हैं।

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