बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद आज मुजफ्फरपुर के जुरन छपरा स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जी राम जी योजना की जानकारी दी और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। मंत्री ने कहा कि भगवान राम के नाम से कुछ लोगों को नफरत है, इसी कारण इस योजना को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि यह योजना गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के लिए लाई गई है। इसका उद्देश्य हर गरीब को रोजगार देना और उसकी गरिमा का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना महात्मा गांधी की रामराज्य की सोच और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार 125 दिन रोजगार और साप्ताहिक भुगतान के बारे में अरुण शंकर प्रसाद ने बताया कि नई योजना के तहत हर ग्रामीण परिवार को, जो बिना कौशल वाला काम करने को तैयार हो, साल में 125 दिन का वेतन युक्त रोजगार मिलेगा। वन क्षेत्रों में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि योजना में मजदूरों को हर हफ्ते भुगतान किया जाएगा, जिससे उन्हें मजदूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बुआई-कटाई के समय 60 दिन काम बंद रहेगा मंत्री ने बताया कि किसानों के हित में बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन तक रोजगार कार्य बंद रखने का प्रावधान रखा गया है। इससे खेती के समय मजदूरों की उपलब्धता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। घोटालों पर रोक के लिए तकनीक आधारित निगरानी पर्यटन मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा में बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ां हुईं। उन्होंने कहा कि नई योजना में रियल टाइम डेटा अपलोड, GPS ट्रैकिंग, मोबाइल मॉनिटरिंग और आधार आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। खर्च का नया फॉर्मूला मंत्री ने बताया कि योजना में खर्च की हिस्सेदारी भी तय की गई है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90 प्रतिशत खर्च केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य वहन करेगा, जबकि अन्य राज्यों में 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य की हिस्सेदारी होगी। उन्होंने कहा कि अगर 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देगी। नाम नहीं, काम पर फोकस मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि पहले की सरकारों में योजनाओं के नाम बदलकर नेताओं के नाम पर रखे जाते रहे। मौजूदा सरकार का फोकस नामकरण नहीं, बल्कि काम पर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी भी योजना का नाम अपने या अपने परिवार के नाम पर नहीं रखा। कार्यक्रम के दौरान भाजपा के कई स्थानीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे। बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद आज मुजफ्फरपुर के जुरन छपरा स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जी राम जी योजना की जानकारी दी और विपक्ष पर तीखा हमला बोला। मंत्री ने कहा कि भगवान राम के नाम से कुछ लोगों को नफरत है, इसी कारण इस योजना को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि यह योजना गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के लिए लाई गई है। इसका उद्देश्य हर गरीब को रोजगार देना और उसकी गरिमा का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि यह योजना महात्मा गांधी की रामराज्य की सोच और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार 125 दिन रोजगार और साप्ताहिक भुगतान के बारे में अरुण शंकर प्रसाद ने बताया कि नई योजना के तहत हर ग्रामीण परिवार को, जो बिना कौशल वाला काम करने को तैयार हो, साल में 125 दिन का वेतन युक्त रोजगार मिलेगा। वन क्षेत्रों में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि योजना में मजदूरों को हर हफ्ते भुगतान किया जाएगा, जिससे उन्हें मजदूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बुआई-कटाई के समय 60 दिन काम बंद रहेगा मंत्री ने बताया कि किसानों के हित में बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन तक रोजगार कार्य बंद रखने का प्रावधान रखा गया है। इससे खेती के समय मजदूरों की उपलब्धता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था। घोटालों पर रोक के लिए तकनीक आधारित निगरानी पर्यटन मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा में बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ां हुईं। उन्होंने कहा कि नई योजना में रियल टाइम डेटा अपलोड, GPS ट्रैकिंग, मोबाइल मॉनिटरिंग और आधार आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लागू किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। खर्च का नया फॉर्मूला मंत्री ने बताया कि योजना में खर्च की हिस्सेदारी भी तय की गई है। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों में 90 प्रतिशत खर्च केंद्र और 10 प्रतिशत राज्य वहन करेगा, जबकि अन्य राज्यों में 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य की हिस्सेदारी होगी। उन्होंने कहा कि अगर 15 दिन के भीतर काम नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देगी। नाम नहीं, काम पर फोकस मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि पहले की सरकारों में योजनाओं के नाम बदलकर नेताओं के नाम पर रखे जाते रहे। मौजूदा सरकार का फोकस नामकरण नहीं, बल्कि काम पर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी भी योजना का नाम अपने या अपने परिवार के नाम पर नहीं रखा। कार्यक्रम के दौरान भाजपा के कई स्थानीय पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।


