लखनऊ में यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करने की मांग तेज हुई। दारुल शफा में समता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के सवाल पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। बैठक में प्रदेश के विभिन्न छात्र संगठनों, किसान संगठनों, सामाजिक-राजनीतिक समूहों, बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय बांस शिल्पी महासंघ द्वारा राजा बेन की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर के किया गया। सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि 28 फरवरी को प्रदेश के सभी जिलों में धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही जिला, ब्लॉक, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर अभियान चलाकर आंदोलन को व्यापक बनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई से पूर्व लखनऊ में सम्मेलन और महापंचायत आयोजित करने की भी घोषणा की गई। वक्ताओं ने कहा कि अगर निर्णय पक्ष में नहीं आता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा साथ ही प्रत्येक जिले में संचालन समितियों का गठन होगा। इस दौरान राजीव ने कहा कि केंद्र सरकार से रोहित एक्ट की तर्ज पर जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ सशक्त कानून बनाने, देशव्यापी जातीय जनगणना कराने के साथ ही जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम शामिल करने की मांग उठाई है । आरोप लगाते हुए कहा कि 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत वृद्धि हुई है और लेटरल एंट्री व अन्य प्रक्रियाओं के जरिए वंचित वर्गों को बाहर किया जा रहा है। सम्मेलन में न्यायपालिका में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की भी मांग की गई। बैठक में प्रयागराज, गाजीपुर, बाराबंकी, आजमगढ़, सुलतानपुर, जौनपुर, उन्नाव, हरदोई, अयोध्या, बलिया, सीतापुर, देवरिया, रायबरेली और बांदा समेत कई जिलों से आए प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर आंदोलन का संकल्प दोहराया।


