नोएडा में ब्लू लाइन के सेक्टर-52 और एक्वा लाइन के सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन को जोड़ने वाला स्काईवॉक जल्द शुरू किया जाएगा। हालांकि 2029 में या 2035 तक इसे डिस्मेंटल कर दिया जाएगा। यहां बनने वाले मॉल से दोनों मेट्रो स्टेशन को इंटर कनेक्ट कर दिया जाएगा। सीईओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि इसका निर्माण हो चुका है। अब प्रियार्टी से जल्द से जल्द शुरू करने की है। सेक्टर-51 में स्वीडन की कंपनी IKEA कंपनी को 49,675 वर्गमीटर जमीन आवंटित की गई है। इसी जमीन पर इंगका सेंटर्स नाम से विशाल मॉल का निर्माण हो रहा है। प्राधिकरण और कंपनी के बीच हुए एग्रीमेंट के मुताबिक, मॉल के डिजाइन में ही सेक्टर-52 और सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशनों को इंटरकनेक्ट करने की व्यवस्था शामिल है। एग्रीमेंट साफ कहता है कि कंपनी 2029 के बाद स्काईवॉक को डिस्मेंटल कर सकती है, क्योंकि तब मॉल के अंदर से ही दोनों स्टेशनों को जोड़ा जाएगा। यदि किसी वजह से 2029 में यह नहीं हटाया गया, तो 2035 में इसे अनिवार्य रूप से तोड़ा जाएगा, क्योंकि तब तक मॉल का निर्माण पूरा हो जाना है। यानी 40 करोड़ रुपये का यह स्काईवॉक अस्थायी ढांचा है, जिसकी उम्र पहले से तय है।
पांच महीने की डेडलाइन, डेढ़ साल बाद भी अधूरा
स्काईवॉक का निर्माण जून 2023 में शुरू हुआ था। इसे महज पांच महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक काम अधूरा है। इस दौरान प्राधिकरण करीब 40 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। अब नई तकनीकी समस्या सामने आई है। सेक्टर-51 की ओर जहां स्काईवॉक को जोड़ा जाना है, वहां बीम आ गई है। समाधान के नाम पर अब स्ट्रक्चर टेस्टिंग कर बीम को हटाने और मेट्रो स्टेशन के भार को दूसरे बीम पर डायवर्ट करने की तैयारी है। यह सब उस स्काईवॉक के लिए किया जा रहा है, जिसे खुद एग्रीमेंट के अनुसार कुछ सालों में तोड़ा जाना है। पहले 2 करोड़ का वॉक-वे
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्काईवॉक से पहले प्राधिकरण ने दोनों स्टेशनों को जोड़ने के लिए वॉक-वे भी बनाया गया है। इस पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। कुछ महीनों तक इस रास्ते पर ई-रिक्शा भी चलाए गए, लेकिन जैसे ही स्काईवॉक का काम शुरू हुआ, वॉक-वे पर ई रिक्शा को बंद कर दिया गया। अब मुसाफिर पैदल ही जाते है।
अब न वॉक-वे पर ई रिक्शा, न स्काईवॉक पूरा हुआ।
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यही है कि जब मॉल बनने के बाद स्थायी इंटरकनेक्शन तय था, तो फिर 42 करोड़ रुपये खर्च कर अस्थायी स्काईवॉक और पाथ वे बनाने की जरूरत क्या थी? क्या यह फैसला यात्रियों की सुविधा के नाम पर लिया गया, फिलहाल हकीकत यही है कि नोएडा में जनता के पैसे से बना यह स्काईवॉक अधूरा, अस्थायी है।


