Skin Benefits of Rice Water: महंगे स्किन-केयर प्रोडक्ट्स के दौर में चावल का पानी एक ऐसा घरेलू उपाय है, जो सदियों से खूबसूरती का राज माना जाता रहा है। इसमें मौजूद प्राकृतिक मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ उसकी बनावट सुधारने में मदद करते हैं। अगर इसे सही तरीके से और लगातार 14 दिन तक इस्तेमाल किया जाए, तो चेहरे की रंगत, टेक्सचर और ग्लो में साफ बदलाव नजर आ सकता है।
Korean Skincare Tips: हफ्ते में दिख सकते हैं ये बदलाव
झाइयां और डार्क स्पॉट हो सकते हैं कम
चावल के पानी में विटामिन B कॉम्प्लेक्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसमें मौजूद इनोसिटोल, विटामिन B6 और विटामिन B2 त्वचा की रंगत को निखारने में मदद करते हैं। ये तत्व हाइपरपिग्मेंटेशन, झाइयों और डार्क स्पॉट्स को हल्का करने में सहायक माने जाते हैं। लगातार दो हफ्ते तक चेहरे पर चावल का पानी लगाने से स्किन ज्यादा क्लियर और ब्राइट नजर आ सकती है।
स्किन बनती है ज्यादा सॉफ्ट और स्मूद
चावल के पानी में मौजूद अमीनो एसिड, विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। इससे स्किन ड्राई और रफ महसूस नहीं होती, बल्कि सॉफ्ट, स्मूद और हेल्दी दिखने लगती है। साथ ही चेहरे पर नेचुरल ग्लो भी आने लगता है।
एक्ने और पिंपल्स में मिलती है राहत
अगर आप फर्मेंटेड राइस वॉटर का इस्तेमाल करते हैं, तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं। फर्मेंटेशन के दौरान इसमें लैक्टिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, जो स्किन के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह पोर्स को टाइट करने में मदद करता है और एक्ने-पिंपल्स को कम करने में सहायक हो सकता है। लैक्टिक एसिड एक माइल्ड नेचुरल एक्सफोलिएंट की तरह काम करता है, जिससे डेड स्किन सेल्स हटते हैं और त्वचा साफ-सुथरी नजर आती है।
फर्मेंटेड राइस वॉटर कैसे बनाएं?
- सबसे पहले 2 कप ऑर्गेनिक चावल को अच्छी तरह धो लें।
- अब इन चावलों में 2 कप साफ पानी डालें।
- इस मिश्रण को ढककर 24 से 48 घंटे तक कमरे के तापमान पर रख दें।
- तय समय के बाद पानी को छान लें।
- इस पानी को किसी साफ स्प्रे बोतल में भर लें।
- इस फर्मेंटेड राइस वॉटर को रोजाना चेहरे पर स्प्रे करें या कॉटन की मदद से लगाएं।
- कुछ ही दिनों में स्किन में फर्क महसूस होने लगेगा।
- करीब दो हफ्तों में चेहरे पर निखार साफ दिख सकता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


