शहर के काकादेव इलाके में हर साल की तरह इस बार भी रामनवमी के पावन अवसर पर भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिला। एम-ब्लॉक स्थित टीम 7878 द्वारा लगातार छठवें वर्ष विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को एकता के सूत्र में पिरोने की एक सामूहिक कोशिश है। आयोजकों का मानना है,कि भक्ति का असली स्वरूप सेवा में ही निहित है और इसी भाव के साथ पूरी टीम तैयारियों में जुटी है। शोभायात्रा की वापसी पर रामभक्तों का स्वागत कार्यक्रम के आयोजक शिवेश सिंह ने बताया कि,रामनवमी के अवसर पर जब शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है और रामलला की पालकी अपनी वापसी की ओर बढ़ती है, ठीक उसी समय टीम 7878 द्वारा इस भंडारे की शुरुआत की जाती है। आयोजन का समय और स्थान इस तरह तय किया गया कि मार्ग से गुजरने वाले हर श्रद्धालु तक प्रसाद सुगमता से पहुँच सके। काकादेव जैसे व्यस्त इलाके में यह आयोजन श्रद्धा का केंद्र बन चुका है, जहां दूर-दराज से आने वाले भक्तों का आत्मीयता के साथ स्वागत किया जाता है। इस विशाल भंडारे का मुख्य उद्देश्य विशुद्ध सेवा भाव है। टीम का एक ही संकल्प है कि उत्सव के इस माहौल में कोई भी रामभक्त भूखा घर न जाए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस साल लगभग 10 से 15 हजार लोगों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। आयोजन से जुड़े सदस्यों का कहना है,कि जब हजारों की संख्या में लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, तो उससे मिलने वाली संतुष्टि शब्दों से परे होती है। यह प्रयास न केवल पेट भरने का है, बल्कि श्रद्धा को साझा करने का भी है। घर-घर से जुटी महिलाएं और पुरुष इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सामूहिक भागीदारी है। यहां किसी बाहरी दिखावे के बजाय इलाके की महिलाएं और पुरुष कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं। घर के पुरुषों से लेकर महिलाओं तक, सब लोग अपनी जिम्मेदारी संभालते हैं। कोई सब्जी कटवाने में हाथ बटाता है, तो कोई वितरण की व्यवस्था देखता है। यह आपसी सहयोग समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देता है, जहां हर कोई एक-दूसरे से जुड़कर सेवा कार्य को सफल बनाने में जुटा रहता है।
दिखावे से दूर सादगी और श्रद्धा का संगम आमतौर पर बड़े आयोजनों में प्रोटोकॉल और औपचारिकताओं का बोलबाला रहता है, लेकिन काकादेव का यह भंडारा अपनी सादगी के लिए अलग पहचान रखता है। यहां न कोई दिखावा है और न ही किसी विशेष पद का अहंकार। यहां सेवा करने वाला हर व्यक्ति खुद को केवल एक ‘सेवक’ मानता है। शुद्धता और सात्विकता का पूरा ध्यान रखते हुए टीम के सदस्य खुद खड़े होकर प्रसाद वितरित करते हैं। पूरी टीम ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ इस विश्वास को आगे बढ़ा रही है कि समाज में एकजुटता बनी रहे।


