वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आयकर अधिकारियों से करदाताओं का जीवन आसान बनाने और जानबूझकर कर चोरी करने वालों को पकड़ने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने को कहा।
उन्होंने प्रारंभ 2026: आयकर अधिनियम, 2025 पर राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान को संबोधित करते हुए भरोसा जताया कि एक अप्रैल से प्रभावी होने वाला आयकर अधिनियम, 2025 निश्चित रूप से भारत को एक कर-अनुकूल देश बनाएगा।
यह मल्टीमीडिया अभियान प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन, आउटडोर, डिजिटल और सोशल मीडिया तक फैला है। इसे नए अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है, जो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत (एक अप्रैल) से लागू होने वाला है।
सीतारमण ने कहा, कर भुगतान को इतना आसान बनाएं कि ईमानदारी स्वाभाविक विकल्प बन जाए। लेकिन जो जानबूझकर चोरी कर रहे हैं, जो जानबूझकर बचने की कोशिश कर रहे हैं, तकनीक उन्हें पकड़ लेगी। यदि आप ईमानदार हैं, तो व्यवस्था आपका जीवन आसान बना देगी, लेकिन यदि आप चोरी करते हैं, तो व्यवस्था आपको ढूंढ लेगी। यह संदेश करदाताओं तक जाना चाहिए।
संसद ने 12 अगस्त, 2025 को छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को बदलने के लिए एक नया आयकर विधेयक पारित किया था। इसमें किसी नयी कर दर का प्रावधान नहीं है, और सिर्फ कानून की को आसान बनाया गया है।
सीतारमण ने कर अधिकारियों से नए कर कानूनों के बारे में स्थानीय भाषाओं में लोगों को शिक्षित करने के लिए पूरे भारत में जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा।
उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी को तेजी से कम करने की कोशिश की जानी चाहिए।
उन्होंने कर अधिकारियों से कहा, आप केवल कर संग्रहकर्ता नहीं हैं, बल्कि सरकार और करदाता के संबंधों का प्रतीक हैं। यह नया कानून आपको इसे सरल बनाने के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त ढांचा देता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इसे सहानुभूति, निष्पक्षता और दक्षता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा, करदाता आपका विरोधी नहीं, राष्ट्र निर्माण में आपका भागीदार है। मैं एक नया नजरिया, एक नई मानसिकता चाहती हूं।
मानसिकता में बदलाव पर जोर देने के लिए उन्होंने हिंदी फिल्म हम हिंदुस्तानी के एक गाने की पंक्तियां याद कीं, छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, आओ मिलकर लिखें हम इनकम टैक्स की नई कहानी।
उन्होंने कहा कि यह फिल्म 1960 में रिलीज हुई थी, जब पुराना आयकर अधिनियम बनाया जा रहा था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मानवीय दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल मानव-केंद्रित डिजिटल युग के लिए है। इसमें नैतिक और नीतिपरक प्रणाली, जवाबदेह शासन, राष्ट्रीय संप्रभुता, सुलभ और समावेशी एआई और वैध प्रणालियां शामिल हैं।
सीतारमण ने कहा कि नई अनुमानित कराधान योजना को मजबूत किया गया है, जो एमएसएमई इकाइयों को बड़ी राहत देगी।
विभाग से अपनी छह अपेक्षाएं साझा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा – संवाद सत्रों को ईमानदारी से लागू करें, करदाताओं के समय का सम्मान करें, मुकदमेबाजी को तेजी से कम करें, युवाओं के साथ जुड़ें, चोरी रोकने के लिए तकनीक का उपयोग करें और इस अधिनियम को पुराने वाले जैसा बोझिल न होने दें।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आयकर विभाग की नई और आधुनिक वेबसाइट भी पेश की। उन्होंने संसद की प्रवर समिति का आभार जताया, जिसने विधेयक की जांच की थी। समिति ने 196 बिंदुओं की सिफारिश की थी, जिनमें से 184 को स्वीकार कर लिया गया।


