SIT को रुपए लेकर डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले आरोपियों के संपर्क में रहे दो एजेंटों का सुराग मिला है। उनको जल्द ही हिरासत में लेकर पूछताछ की जा सकती है। एक ने डिस्टेंस लर्निंग कोर्स की फ्रेंचाइजी ली हुई थी। उसके सेंटर में काफी संख्या में छात्र-छात्राएं कोर्स व डिग्री के संबंध में जानकारी लेने आया करते थे। कुछ अभिभावकों ने सेंटर संचालक की डिटेल पुलिस को दी, जिसके आधार पर गिरोह में शामिल अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। नौबस्ता के ललित की गिरफ्तारी से मिली कई जानकारियां किदवई नगर पुलिस ने रुपए लेकर डिग्री व मार्कशीट बनाने के आरोप में शैलेंद्र कुमार ओझा, नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह जेल भेजा है। आरोपियों से जुड़े छतरपुर के मयंक भारद्वाज, हैदराबाद के मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद के विनीत, भोपाल के शेखू व शुभम दुबे की तलाश की जा रही है। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर हेडक्वार्टर संकल्प शर्मा ने बताया कि नौबस्ता के ललित मोहन अवस्थी की गिरफ्तारी से SIT को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। उनसे पूछताछ के बाद दो और एजेंटों का पता चला है। उनमें से एक ने डिसटेंस लर्निंग कोर्स की फ्रेंचाइजी ली हुई थी, उसके कई विश्वविद्यालयों से संपर्क हैं। उसी संपर्क के बदौलत जेल गए शैलेंद्र कुमार ओझा व उसके साथी मार्कशीट व डिग्री बनाने का खेल कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शुरुआत में आरोपी छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालयों से एनरॉल्मेंट कराकर पूरी प्रक्रिया कराया करते थे। कुछ छात्रों ने फीस जमा करने के बाद दाखिला भी लिया था। बस उनको कक्षाओं में उपस्थित होने की अनिवार्यता नहीं थी। केवल परीक्षा के समय हाजिर हो जाते थे। SIT सूत्रों के मुताबिक 14 विश्वविद्यालयों में से दो के कुछ मार्केटिंग और सेल्स टीम के स्टाफ की जानकारी मिली है। यह स्टाफ कर्मी रुपये लेकर डिग्री व मार्कशीट बनाने वाले आरोपियों के संपर्क में लंबे समय से थे। उनके शहर में आकर और कुछ दिन तक रुकने के इनपुट मिले हैं। पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है। इस संबंध में विश्वविद्यालयों को पत्र भी भेजा गया है। उनसे स्टाफ कर्मियों के बारे में जानकारी मांगी गई है।


