SIT फैक्ट फाइंडिंग: नोएडा हादसे में किसकी लापरवाही?:रडार पर सुरक्षा मानक, रिस्पांस टाइम, इन्फ्रास्ट्रक्चर और जिम्मेदारी

SIT फैक्ट फाइंडिंग: नोएडा हादसे में किसकी लापरवाही?:रडार पर सुरक्षा मानक, रिस्पांस टाइम, इन्फ्रास्ट्रक्चर और जिम्मेदारी

सेक्टर-150 स्पोर्टस सिटी प्लाट नंबर एससी-02/150 तारीख 16-17 जनवरी की रात नोएडा में युवराज मेहता की कार एक 70 फुट गहरे, पानी भरे बेसमेंट में दुर्घटनाग्रस्त होकर डूब गई। जहां वे कुछ देर तक जिंदा रहे और मदद के लिए आवाज देते रहे। यह गड्ढा एक निर्माणाधीन साइट का अंडरग्राउंड बेसमेंट था, जिसके चारों ओर कोई बैरिकेड, रिफ्लेक्टर्स या चेतावनी संकेत नहीं थे। यहां तक कि कई साल से यह गड्ढा इसी स्थिति में था, जिससे स्थानीय निवासियों ने पहले भी शिकायतें की थीं। मुख्य घटना के CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और पिता के बयान के अनुसार, युवराज ने कार के पानी में डूबने से पहले अपने पिता को फोन किया और अपनी स्थिति बताई। पिता ने तुरंत 112 पर कॉल की और मौके पर पहुंचे, लेकिन भारी कोहरे और अंधेरी स्थिति के कारण मदद मौके पर पहुंचने के बावजूद प्रभावी बचाव नहीं हो पाया। इन बिंदुओं पर एसआईटी की टीम कर सकती है फैक्ट फाइडिंग। SIT फैक्ट फाइंडिंग-1
घटना के समय कंट्रोल रूम/वार रूम को चेतावनी तुरंत मिली थी और पुलिस लगभग 9 मिनट में पहुंच गई, उसके बाद फायर ब्रिगेड लगभग 30 से 45 मिनट में, SDRF 71 मिनट में, और NDRF करीब 2 घंटे बाद मौके पर पहुंचा। लेकिन इन टीमों के पास विशेष डाइवर्स, उचित उपकरण या 70 फीट लंबी क्रेन आदि नहीं थे, जिससे वे गहरे जल में उतरकर युवराज तक पहुंच न सके। पुलिस और राहत कर्मी लगातार यह बताते रहे कि कोहरा, गहरे पानी और निर्माण सामग्री की स्थिति ने बचाव को और कठिन बना दिया, जबकि युवराज कार की छत पर लगभग 80 मिनट तक जीवित रहा और सहायता के लिए चिल्लाता रहा। लेकिन उपलब्ध संसाधनों की कमी, वहां प्रशिक्षित डाइवर्स का अभाव और रणनीतिक योजना की कमी के कारण उसे समय पर निकाला नहीं जा सका। SIT फैक्ट फाइंडिंग-2 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की, जिसे पांच दिनों में एक विस्तृत रिपोर्ट देना है। जांच के दो दिन पूरे हो चुके है। SIT को यह जांचने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि: SIT फैक्ट फाइंडिंग -3 SIT फैक्ट फाइंडिंग-4 युवराज की कार अंततः 91 घंटे बाद निकाली गई, और उसके टूटे विंडशील्ड तथा खुली सन रूफ जैसी तकनीकी सबूत भी SIT द्वारा जांचे जा रहे हैं। इस मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं, बल्कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, कंट्रोल रूम प्रोटोकॉल और टीम ट्रेनिंग की मौलिक कमजोरियों को उजागर किया है। एसआईटी को इनसे मिलेगी मदद

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