पाप-पुण्य जन्म-जन्मांतर तक नहीं छोड़ते पीछा, मनुष्य का जीवन उसके कर्मों के अधीन

पाप-पुण्य जन्म-जन्मांतर तक नहीं छोड़ते पीछा, मनुष्य का जीवन उसके कर्मों के अधीन
  • श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के छठे दिन मंडल पर चढ़ाए गए 656 अर्घ्य
  • आरके कॉलोनी के आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिक महापर्व की धूम

भीलवाड़ा आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे अष्टानिक महापर्व में इन दिनों भक्ति और धर्म की बयार बह रही है। रविवार को पर्व के छठे दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन हुआ। विधानाचार्य पंडित जयकुमार जैन के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ मंडल पर 656 अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ कमाया।

‘जैसा बोओगे, वैसा ही काटना पड़ेगा’

विधान के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित जयकुमार जैन ने जीवन में कर्मों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाप और पुण्य किसी भी जन्म में मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ते हैं। पंडित जैन ने स्पष्ट किया कि यह सब अपने-अपने कर्मों के पाप-पुण्य का ही फल है। संसार का यह अटल नियम है कि जिसने जैसा बोया है, उसे वैसा ही काटना पड़ेगा। इसलिए मनुष्य को सदैव सद्कर्म करने चाहिए, धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए और पाप कर्मों से बचना चाहिए।

रत्न वर्षा और भक्तामर आरती ने मोहा मन

आयोजन के दौरान सौधर्म इंद्र एवं यज्ञ नायक तथा धनपति कुबेर की भूमिका निभा रहे संत कुमार पाटनी ने रत्न वर्षा की, जिसने सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इससे पूर्व प्रातः काल श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ। श्राविका अनिता शाह की ओर से छह उपवास सफलतापूर्वक पूर्ण करने के उपलक्ष्य में ललित एवं श्रुति शाह परिवार को आदिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक और शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। ललित शाह ने श्रीजी को अपने सिर पर लेकर नगर भ्रमण करवाया। इसके पश्चात श्री सिद्ध चक्र विधान की विशेष पूजा-अर्चना की गई। सायंकाल में श्रीजी की संगीतमयी भक्तामर आरती उतारी गई, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उत्साह के साथ भाग लिया।

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