आज सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में आयोजित समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय संविधान के सिंधी भाषा संस्करण (देवनागरी एवं फारसी लिपि) का विधिवत विमोचन किया। इस कार्यक्रम में उदयपुर से राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष हरीश राजानी, उदयपुर सिंधी सेंट्रल युवा संगठन के अध्यक्ष विजय आहूजा और महासचिव मुकेश खिलवानी ने विशेष अतिथि के रूप में शिरकत कर उदयपुर और संपूर्ण राजस्थान के सिंधी समाज का गौरव बढ़ाया। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और इंदौर सांसद शंकर लालवानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने संविधान के अनुवाद कार्य की सराहना करते हुए कहा कि अपनी मातृभाषा में संविधान को पढ़ना हर नागरिक का अधिकार है और सिंधी भाषा में यह अनुवाद भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आहूजा और खिलवानी ने केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ उदयपुर के सिंधी समाज की सक्रियता और भाषाई जागरूकता पर चर्चा की। आहूजा ने कहा कि “आज का दिन हमारे जीवन का सबसे स्मरणीय दिन है। उपराष्ट्रपति भवन में अपनी मातृभाषा सिंधी में देश के सर्वोच्च ग्रंथ ‘संविधान’ का विमोचन होते देखना एक भावनात्मक और गर्व भरा अनुभव है। यह सिंधी भाषा की मान्यता और सम्मान की जीत है। खिलवानी ने कहा कि राजभाषा खंड द्वारा तैयार यह संस्करण अब सिंधी भाषी समाज के लिए उपलब्ध होगा, जिससे युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और देश के कानून से जुड़ सकेगी।


