बिहार को फाइलेरिया मुक्त बनाने और 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बुधवार को भोजपुर जिले में व्यापक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) महाअभियान की शुरुआत की गई। महाअभियान के तहत जिले भर में एक साथ घर-घर जाकर फाइलेरियारोधी दवाओं का सेवन कराया जा रहा है, ताकि हाथीपांव जैसी गंभीर और आजीवन अपंगता देने वाली बीमारी की संक्रमण श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ा जा सके। अभियान का शुभारंभ सिविल सर्जन शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने आरा मॉडल सदर अस्पताल में फीता काटकर किया। इस मौके पर उन्होंने विधिवत उद्घाटन किया और अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फाइलेरिया एक रोकथाम योग्य रोग है, जिसे सामूहिक प्रयास और नियमित दवा सेवन से जड़ से खत्म किया जा सकता है। अभियान के प्रति लोगों में भरोसा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों ने स्वयं दवा का सेवन कर उदाहरण प्रस्तुत किया। जिले में यह अभियान अभूतपूर्व स्तर पर चलाया जा रहा है। एक जिला अस्पताल, एक अनुमंडलीय अस्पताल, 21 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, 303 आयुष्मान–आरोग्य केंद्रों सहित कुल 430 स्थानों पर दवा खिलाने का कार्य किया जा रहा है। भोजपुर जिले में करीब 28 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से केवल बुधवार को ही लगभग आठ लाख लोगों को दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग ने 1622 टीमों का गठन किया महाअभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 1622 टीमों का गठन किया है, जिनमें आशा, आंगनबाड़ी सेविका, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। ये टीमें घर-घर जाकर निःशुल्क डीईसी, एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन दवाएं खिला रही हैं। हालांकि, 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे दवा अवश्य लें और भोजपुर को फाइलेरिया मुक्त बनाने में सहयोग करें।
प्रचार-प्रसार का दौर जारी सिविल सर्जन शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि आज बिहार और भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। बिहार फाइलेरियासिस बीमारी से पीड़ित है। पुरुष में हाइड्रोसील, महिलाओं में हाथीपांव जैसे लक्षण होते हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल दवा खिलाने का प्रोग्राम रखते हैं। यह प्रोग्राम 10 फरवरी से 27 फरवरी तक चलेगा। आज का दिन महा अभियान के रूप में 350 अस्पतालों समेत निजी और सरकारी विद्यालयों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्रों समेत अलग-अलग सेंटरों पर बूथ लगाकर दवा वितरण नहीं करके खिलाई जा रही है। हम भोजपुरवाशियों से आह्वान करेंगे की इस दवा का सेवन अवश्य करें, ताकि फाइलेरिया बीमारी से जूझ रहे लोगों को बचाव कर सकें। जिले में जागरूकता के लिए पोस्टर-बैनर लगाकर गाड़ियां चलाई जा रही है। जोर शोर से प्रचार-प्रसार हो रहा है। बिहार को फाइलेरिया मुक्त बनाने और 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बुधवार को भोजपुर जिले में व्यापक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) महाअभियान की शुरुआत की गई। महाअभियान के तहत जिले भर में एक साथ घर-घर जाकर फाइलेरियारोधी दवाओं का सेवन कराया जा रहा है, ताकि हाथीपांव जैसी गंभीर और आजीवन अपंगता देने वाली बीमारी की संक्रमण श्रृंखला को पूरी तरह तोड़ा जा सके। अभियान का शुभारंभ सिविल सर्जन शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने आरा मॉडल सदर अस्पताल में फीता काटकर किया। इस मौके पर उन्होंने विधिवत उद्घाटन किया और अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फाइलेरिया एक रोकथाम योग्य रोग है, जिसे सामूहिक प्रयास और नियमित दवा सेवन से जड़ से खत्म किया जा सकता है। अभियान के प्रति लोगों में भरोसा बढ़ाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों ने स्वयं दवा का सेवन कर उदाहरण प्रस्तुत किया। जिले में यह अभियान अभूतपूर्व स्तर पर चलाया जा रहा है। एक जिला अस्पताल, एक अनुमंडलीय अस्पताल, 21 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, 303 आयुष्मान–आरोग्य केंद्रों सहित कुल 430 स्थानों पर दवा खिलाने का कार्य किया जा रहा है। भोजपुर जिले में करीब 28 लाख लोगों को दवा खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से केवल बुधवार को ही लगभग आठ लाख लोगों को दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। विभाग ने 1622 टीमों का गठन किया महाअभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 1622 टीमों का गठन किया है, जिनमें आशा, आंगनबाड़ी सेविका, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। ये टीमें घर-घर जाकर निःशुल्क डीईसी, एल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन दवाएं खिला रही हैं। हालांकि, 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे दवा अवश्य लें और भोजपुर को फाइलेरिया मुक्त बनाने में सहयोग करें।
प्रचार-प्रसार का दौर जारी सिविल सर्जन शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि आज बिहार और भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। बिहार फाइलेरियासिस बीमारी से पीड़ित है। पुरुष में हाइड्रोसील, महिलाओं में हाथीपांव जैसे लक्षण होते हैं। इसे कंट्रोल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल दवा खिलाने का प्रोग्राम रखते हैं। यह प्रोग्राम 10 फरवरी से 27 फरवरी तक चलेगा। आज का दिन महा अभियान के रूप में 350 अस्पतालों समेत निजी और सरकारी विद्यालयों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्रों समेत अलग-अलग सेंटरों पर बूथ लगाकर दवा वितरण नहीं करके खिलाई जा रही है। हम भोजपुरवाशियों से आह्वान करेंगे की इस दवा का सेवन अवश्य करें, ताकि फाइलेरिया बीमारी से जूझ रहे लोगों को बचाव कर सकें। जिले में जागरूकता के लिए पोस्टर-बैनर लगाकर गाड़ियां चलाई जा रही है। जोर शोर से प्रचार-प्रसार हो रहा है।


