एसआई भर्ती-2021: राज्य सरकार ने कहा- जांच में दोषियों व निर्दोषों की छंटनी करना संभव, अब रखा जाएगा प्रशिक्षु थानेदारों का पक्ष

एसआई भर्ती-2021: राज्य सरकार ने कहा- जांच में दोषियों व निर्दोषों की छंटनी करना संभव, अब रखा जाएगा प्रशिक्षु थानेदारों का पक्ष

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट में पुलिस उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती-2021 को रद्द करने के एकलपीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। राज्य सरकार ने स्पष्ट कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सामने आए नकल और फर्जीवाड़े के मामलों में दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों की पहचान कर उन्हें अलग किया जा सकता है, इसलिए पूरी भर्ती को रद्द करना उचित नहीं है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले से जुड़ी 12 अपीलों पर करीब दो घंटे तक सुनवाई की। इन अपीलों में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तत्कालीन अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय, तत्कालीन सदस्य मंजू शर्मा और संगीता आर्य सहित अन्य की याचिकाएं भी शामिल हैं। विस्तृत सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट में बहस पूरी करते हुए जांच से जुड़े तथ्य रखे। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि जांच के दौरान दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग नहीं किया जा सकता। अब तक की जांच में कुल 64 अभ्यर्थियों को नकल और अनियमितताओं में लिप्त पाया गया है। इनमें से 51 प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि 13 को निलंबित किया गया है।

महाधिवक्ता ने दलील दी कि जब जांच एजेंसियां दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं, तो पूरी एसआई भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना न्यायसंगत नहीं है। सरकार का पक्ष है कि निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए केवल दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकार की बहस पूरी होने के बाद अब प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों (थानेदारों) की ओर से पक्ष रखा जाएगा। यह मामला राज्य की सबसे विवादित भर्तियों में से एक माना जा रहा है, जिस पर प्रदेशभर के अभ्यर्थियों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *