गोरखपुर में पुरुषोत्तम सत्संग मंडल की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभ किया गया। पहले दिन की कथा में कथा व्यास सुरक्षा आचार्य ने भागवत कथा सुनने की महिमा वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक है। पहले दिन भव्य कलश यात्रा से कार्यक्रम की शुरुआत की गई। शहर की महिलाएं सर पर कलश रखकर भजन गाते हुए ठोल- नगाड़ें और गाजे बाजे के साथ विवेक लॉन तक पहुंची। वहीं कथा के दौरान भी ज्यादा संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने सुरक्षा आचार्य की ओर से सुनाई गई गीता के एक-एक शब्द को पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से सुना। सभी कथा में लीन नजर आएं। भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक
पहले दिन की कथा में सुरक्षा आचार्य ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा के सुनने से प्राणी मात्र जन्मों के विकार नष्ट होने के बल्कि उनका अलौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। उन्होंने कहा कि भागवत पुराण हिंदुओं के 18 पुराणों में से एक है। इसका मुख्य भक्ति योग है, जिसमें श्री कृष्ण को सभी देवों के देव स्वयं भगवान रूप में चित्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान की विभिन्न कथाओं का सार भागवत मोक्ष दाहिनी है। इसे सुनने से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई और कलयुग में आज इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है। भागवत संशय से लेकर समाधान तक की यात्रा
कथा प्रवक्ता सुरक्षा आचार्य ने प्रमाण पत्र शब्दों में कहा कि आज समाज में जो भी विकृतियों आ रही है वह मनुष्यों के अच्छे संस्कारों की कमी होने के कारण है यह भागवत संशय से लेकर समाधान तक की यात्रा है। जिसमें मनुष्य का हर समस्या का समाधान और भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करते हैं। अशांति का मुख्य कारण लौकिक सुखों के पीछे भागना
उन्होंने कहा कि जीवन में अशांति का मुख्य कारण लौकिक सुखों के पीछे भागना है। इसलिए हमें भागना नहीं जागना है। कथा प्रवक्ता ने भीष्म स्थिति प्रसंग में संगीत शैली का वर्णन करते हुए कहा कि प्रथम स्कंध में तीन पीढियां की सद्गति का वर्णन मिलता है। जिसमें जीवन से हार जाओ, थक जाओ और कहीं सहारा ना मिले तो प्रभु के शरण में जाओ। इस अवसर पर पुरुषोत्तम सत्संग मंडल के अध्यक्ष राजेश कुमार द्विवेदी, यजमान परिवार प्रहलाद दास गुप्ता, रेखा गुप्ता, ध्रुव गुप्ता, नारायण, कमलेश पांडे, शशि कला पांडे और भारी संख्या में भक्त मौजूद रहें।


