भास्कर संवाददाता | भैरूंदा सिविल अस्पताल इन दिनों स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। डॉक्टरों की कमी है। नर्सिंग स्टाफ भी कम है। मरीजों को लंबी कतार में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोग मजबूरी में निजी अस्पताल जा रहे हैं। कई लोग भोपाल का रुख कर रहे हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। अस्पताल में अभी सिर्फ चार डॉक्टर पदस्थ हैं। मरीजों की संख्या हर दिन सैकड़ों में पहुंच रही है। सुबह ओपीडी और ओटी में सिर्फ एक डॉक्टर बैठते हैं। 25 से 30 मरीजों की लाइन लग जाती है। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर राहुल दांगी ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण उन्हें ओपीडी के साथ इमरजेंसी ड्यूटी करनी पड़ती है। नाइट ड्यूटी भी करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि वे हर दिन करीब 200 मरीज देख रहे हैं। गंभीर मरीजों को भी लाइन में इंतजार करना पड़ता है। परेशानी बढ़ रही है। पिछले करीब दो महीने से अस्पताल में एक भी महिला डॉक्टर पदस्थ नहीं है। महिला मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। स्त्री रोग की समस्या वाले मरीजों को भी निजी अस्पताल या भोपाल जाना पड़ रहा है। अस्पताल में कम से कम 30 सिस्टर की जरूरत है। अभी 13-14 सिस्टर ही काम कर रही हैं। ओटी के समय 7-8 सिस्टर चाहिए। व्यवस्था सिर्फ दो नर्स संभाल रही हैं। एक्सीडेंट मामला आने पर संभालना कठिन स्टाफ के अनुसार, यदि इसी दौरान कोई डिलीवरी केस या एक्सीडेंट का मामला आ जाए तो स्थिति संभालना कठिन हो जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि पर्याप्त स्टाफ होने पर मरीजों को राहत मिल सकती है और काम का दबाव भी संतुलित रहेगा। मरीजों को करना पड़ता है लंबा इंतजार अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों ने बताया कि एक ही डॉक्टर के कारण लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार मरीज भी लाइन में खड़े रहते हैं। मरीजों का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे निजी अस्पताल नहीं जा सकते, लेकिन यहां भी पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया ^ अस्पताल में स्टाफ की कमी है। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया गया है और जल्द ही रिक्त पदों पर नियुक्ति की उम्मीद है। उनका कहना है कि जैसे ही पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होगा, मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। – मनीष सारस्वत, सीबीएमओ, भैरूंदा


