पीलीभीत में धान खरीद सत्र 2025-26 के दौरान बोरों की कमी के कारण एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। क्रय एजेंसियों के पास चावल (सीएमआर) उतारने के लिए पर्याप्त बोरे उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के डिपो में चावल की डिलीवरी नहीं हो पा रही है। इस स्थिति को देखते हुए, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता प्रदीप सिंह ने जिला खाद्य विपणन अधिकारी विजय कुमार शुक्ला को तत्काल बोरों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पत्र लिखा है। सरकारी पत्र के अनुसार, पीसीयू, पीसीएफ और यूपीएसएस जैसी एजेंसियां धान की खरीद तो कर रही हैं, लेकिन सीएमआर प्रेषण के लिए बोरों की कमी के कारण मिलें चावल एफसीआई को नहीं भेज पा रही हैं। इस वजह से मिलों में धान फंसा हुआ है और बिलिंग प्रक्रिया ठप हो गई है। इसका सीधा असर धान की उठान पर पड़ रहा है। जब तक मिलों से पुराना चावल एफसीआई को नहीं भेजा जाएगा, तब तक क्रय केंद्रों पर पड़ा शेष धान मिलों को डिलीवर नहीं किया जा सकेगा। परिणामस्वरूप, खरीद केंद्रों पर धान का अंबार लगने लगा है। यह समस्या केवल भंडारण तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के भुगतान पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। क्रय एजेंसियां शासन से ऋण लेकर धान की खरीद करती हैं। नियमानुसार, जब एजेंसियां एफसीआई को चावल सौंपती हैं, तभी उनकी बिलिंग होती है और प्राप्त धनराशि से किसानों का भुगतान किया जाता है। बोरों के अभाव में बिलिंग प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे किसानों को उनके धान का भुगतान मिलने में देरी होने की आशंका है। 16 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, तीनों प्रमुख एजेंसियों को लाखों बोरों की तत्काल आवश्यकता है। पीसीएफ को 2,49,415 बोरों (499 गांठ), पीसीयू को 2,83,375 बोरों (567 गांठ) और यूपीएसएस को 2,63,851 बोरों (528 गांठ) की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते पर्याप्त बोरों की व्यवस्था नहीं की गई, तो पूरी खरीद प्रक्रिया और आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।


