कैमूर जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत और वितरण व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। सुबह से ही गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सबसे गंभीर समस्या यह है कि उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिले बिना ही सिस्टम में डिलीवरी ‘सफल’ दिखाई जा रही है, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके पास ओटीपी होने के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिल रही है, लेकिन रिकॉर्ड में सिलेंडर ‘डिलीवर’ दिखाया जा रहा है। इस अनियमितता के कारण लोग परेशान हैं और उन्हें बार-बार एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण विनोद कुमार चौरसिया और खुर्शीद अहमद खान ने बताया कि ओटीपी आने के बाद भी उन्हें गैस नहीं मिली, जबकि सिस्टम में डिलीवरी सफल दर्ज हो गई है। खुर्शीद के अनुसार, उनके परिवार के रोजा में होने के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिली और दोबारा बुकिंग करने पर अप्रैल की तारीख दी जा रही है। एक अन्य उपभोक्ता आशुतोष पांडे ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि होम डिलीवरी के नाम पर वेंडर चार दिनों तक नहीं आया। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में शिकायत की, लेकिन कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इस वजह से बच्चों के स्कूल और रसोई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एडीएसओ अयाज अहमद ने कहा कि जिले में गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। उन्होंने इस स्थिति को ‘पैनिक बुकिंग’ का परिणाम बताया। एडीएसओ ने आश्वासन दिया कि गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और सभी वेंडरों को अपने मोबाइल फोन चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके। हालांकि, प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिख रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है और गैस के लिए उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कैमूर जिले में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत और वितरण व्यवस्था में बड़ी गड़बड़ी को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश है। सुबह से ही गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सबसे गंभीर समस्या यह है कि उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिले बिना ही सिस्टम में डिलीवरी ‘सफल’ दिखाई जा रही है, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके पास ओटीपी होने के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिल रही है, लेकिन रिकॉर्ड में सिलेंडर ‘डिलीवर’ दिखाया जा रहा है। इस अनियमितता के कारण लोग परेशान हैं और उन्हें बार-बार एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण विनोद कुमार चौरसिया और खुर्शीद अहमद खान ने बताया कि ओटीपी आने के बाद भी उन्हें गैस नहीं मिली, जबकि सिस्टम में डिलीवरी सफल दर्ज हो गई है। खुर्शीद के अनुसार, उनके परिवार के रोजा में होने के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिली और दोबारा बुकिंग करने पर अप्रैल की तारीख दी जा रही है। एक अन्य उपभोक्ता आशुतोष पांडे ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि होम डिलीवरी के नाम पर वेंडर चार दिनों तक नहीं आया। उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में शिकायत की, लेकिन कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इस वजह से बच्चों के स्कूल और रसोई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एडीएसओ अयाज अहमद ने कहा कि जिले में गैस की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। उन्होंने इस स्थिति को ‘पैनिक बुकिंग’ का परिणाम बताया। एडीएसओ ने आश्वासन दिया कि गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और सभी वेंडरों को अपने मोबाइल फोन चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके। हालांकि, प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिख रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है और गैस के लिए उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है, जिससे उनमें आक्रोश बढ़ता जा रहा है।


