बेगूसराय में सोमवार को दिनदहाड़े मारे गए जमीन ब्रोकर (कारोबारी) वरुण चौधरी उर्फ वरुण सिंह का अंतिम संस्कार सिमरिया गंगा घाट पर मंगलवार को कर दिया गया। वरुण चौधरी के बड़े बेटे आशीष उर्फ सोनू ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए। एफआईआर के अनुसार छोटे बेटे निर्मल उर्फ सूरजभान के सामने अपराधियों ने वरुण को गोली मारी थी। वरुण पहले बॉडीगार्ड के साथ चलते थे, पर दो महीने पहले उन्होंने बॉडीगार्ड को हटाया था। घटना को लेकर वरुण चौधरी के परिजन में काफी आक्रोश है। वहीं, पुलिस वारदात के बाद से हर पहलू पर नजर रख रही है। मामले की जांच, फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एक नामजद समेत 2 संदिग्ध को उठाकर पूछताछ की जा रही है। दोनों संदिग्ध नागदह मोहल्ला के रहने वाले हैं, जिसमें एक का घर घटनास्थल के बिल्कुल करीब है। हालांकि दो लोगों को हिरासत में लिए जाने के संबंध में पुलिस अभी कुछ नहीं बता रही है। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल अपराधियों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी सहित अन्य कार्रवाई चल रही है। हत्या क्यों हुई यह अभी जांच का विषय है और जल्द ही इस मामले का खुलासा हो जाएगा। जमीन ब्रोकर की हत्या का मामला क्या है? हत्या क्यों की गई? किसने की? परिवार और पुलिस का वारदात को लेकर क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले हत्या की वारदात के बारे में जानिए बदमाशों ने सोमवार को दिनदहाड़े कपस्या मोहल्ले में करीब 25 वर्षों से घर बना कर रह रहे डंडारी थाना क्षेत्र के मेहां गांव के रहने वाले स्व. गिरिजानंदन चौधरी के सबसे छोटे पुत्र वरुण चौधरी (52 वर्ष) को दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला था। वरुण चौधरी को कुल चार गोली लगी, जिसमें से पोस्टमार्टम के दौरान दो गोली निकली गई, जबकि दो खोखा पुलिस ने घटनास्थल से बरामद किया था। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी में पूरी घटना कैद हो गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि एक बाइक पर सवार तीन युवक भाग रहे हैं। बाइक चला रहे युवक ने मुंह नहीं ढंका था, जबकि बीच में बैठे युवक ने अपना मुंह छिपा रखा था। जबकि पीछे बैठा युवक बगैर मुंह ढके हुए था और उसके हाथ में पिस्टल था। संभावना जताई जा रही है कि पीछे बैठे युवक ने नागदह की ओर से कपस्या लौट रहे वरुण चौधरी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। अब सीसीटीवी की दो तस्वीरें देखें… 20 मिनट से अधिक समय तक सड़क पर तड़पते रहे वरुण चौधरी दिनदहाड़े 49 नंबर ढ़ाला के आगे तीनमुहानी पर वरुण चौधरी को गोली मारने के बाद हत्यारे भाग गए। ताबड़तोड़ गोली चलता देख आसपास के लोग घर में छुप गए और 20 मिनट से अधिक समय तक वरुण चौधरी सड़क पर तड़पते रहे। बाद में उनके पुत्र छोटे बेटे निर्मल उर्फ छोटू उर्फ सूरजभान सिंह को जब घटना की जानकारी मिली तो वह अपनी गाड़ी लेकर आया और तड़प रहे पिता को उठाकर गोली का इलाज करने के लिए प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचा। जहां डॉक्टरों ने वरुण चौधरी को सदर अस्पताल रेफर कर दिया। सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने वरुण चौधरी को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस हत्या की वजहों को लेकर स्पष्ट नहीं, कहा- जमीन के कारोबार में मर्डर की आशंका फिलहाल, पुलिस इस मामले में सिर्फ इतना बता रही है कि जमीन के कारोबार में ब्रोकर वरुण चौधरी की हत्या होने की आशंका है। लेकिन स्थानीय स्तर पर स्पष्ट हो चुका है कि वरुण चौधरी की हत्या का कारण सिर्फ और सिर्फ जमीन का कारोबार ही है। दरअसल, बेगूसराय शहर के नागदह, पचंबा और आसपास की जमीन शहरीकरण के कारण जब मंहगी हो गई तो अलग-अलग तरह के छोटे कारोबार में जुटे लोग जमीन ब्रोकिंग के धंधे में आ गए। अपने गांव में संदिग्ध गतिविधि में शामिल वरुण चौधरी भी जब गांव छोड़कर बेगूसराय आए तो उन्होंने जमीन ब्रोकिंग को अपना धंधा बनाया। जमीन ब्रोकिंग से उन्होंने 50 करोड़ से भी अधिक की संपत्ति हासिल बनाया। लेकिन वरुण चौधरी का बढ़ता कारोबार आसपास के जमीन ब्रोकरों को पसंद नहीं था। वे लोग नहीं चाहते थे कि कोई बाहर से आकर यहां भारी पैमाने पर जमीन की कारोबार करे और इसीलिए वरुण चौधरी को मार दिया गया है। अब जानिए, वरुण चौधरी की हत्या में किसका हाथ? चर्चा है कि मारने में किसी अन्य का नहीं, बल्कि उन्हीं लोगों का हाथ है जिनकी पहले वरुण चौधरी से दोस्ती थी। जमीन कारोबार के कारण दोस्ती दुश्मनी में बदली और फिर दुश्मनी दोस्ती में बदल गई जो हत्या का कारण बना। सूत्रों की मानें तो नागदह के रहने वाले पशुपति साह की 50 से 60 बीघा जमीन था। इस जमीन की बिक्री को लेकर कई भू-माफिया सक्रिय हुए और उस जमीन के चक्कर में 10 से अधिक लोगों की बीते 10 वर्षों में हत्या हो चुकी है। पशुपति साह की जमीन कई दबंग जमीन ब्रोकर बेचते थे। लेकिन वरुण चौधरी कि उनसे अधिक बन गई और सबसे अधिक जमीन वरुण चौधरी ने बेचा जो शहर के ब्रोकरों को पसंद नहीं था। जमीन कारोबार की इस विवाद में वरुण चौधरी ने जहां अलका सिनेमा हॉल के पीछे तीन कट्ठा जमीन में चार मंजिला आलीशान घर बनवाया तो अपने गांव मेहां में भी 50 से 60 बीघा जमीन खरीदा, साथ में तीन-चार लग्जरी गाड़ी भी खरीदी। बड़े बेटे आशीष को पढ़ा लिखा कर इंजीनियर बनाया जो नोएडा में इंजीनियरिंग करता है। जबकि छोटा बेटा निर्मल उर्फ सूरजभान अपने पिता के साथ ही रहता था। वरुण चौधरी की बढ़ती कमाई से इसके कई दुश्मन पैदा हुए। इस बीच विभिन्न विवाद को लेकर उन पर 10 से अधिक मामले भी दर्ज हुए, लेकिन ठोस सबूत और गवाह नहीं रहने के कारण वरुण सभी मुकदमे में बरी होते चले गए। बाहुबली अनंत सिंह तक था वरुण चौधरी का नेटवर्क इस दौरान उनका नेटवर्क बेगूसराय से आगे बढ़कर अनंत सिंह तक पहुंच गया। हाल के दिनों में वरुण चौधरी का बेटा सूरजभान जब सक्रिय हुआ तो उसकी अनंत सिंह से काफी नजदीक हो गई। वह काले रंग की लग्जरी गाड़ी में चलता था। लेकिन वरुण चौधरी हमेशा सीधे-साधे वेशभूषा में रहते और अपाची बाइक से हेलमेट लगाकर ही चलते थे। सोमवार को उन्होंने यूको बैंक से कुछ पैसा निकाला और एक मित्र से दो लाख लिए थे। इसके बाद नागदह के नजदीक 27 कट्ठा जमीन का महदा कराने जमीन मालिक को एडवांस देने के लिए गए थे। वहां से घर लौटने के दौरान जैसे 49 नंबर गुमटी पार कर तीनमुहानी के पास पहुंचे की दोपहर करीब 1:20 बजे साथ बाइक सवार तीन बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोली मार दी। गोली लगते ही वरुण चौधरी गिरे और हेलमेट खुलकर दूर फेंका गया। वरुण चौधरी के गिरने के बाद एक ई-रिक्शा चालक वहां पहुंचा। लेकिन वह भी डर से नजदीक नहीं गया और ई रिक्शा मोड़ कर वापस लौट गया। वहीं कुछ लोग देखते रहे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। कहा जा रहा है कि अपराध जगत में सक्रिय लोग जब जमीन, शराब और स्मैक के कारोबार में शामिल हुए तो यह लोग लंबे समय से वरुण चौधरी को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे। लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। अपने ऊपर खतरा को देखते हुए उन्होंने आधुनिक राइफल से लैस दो निजी बॉडीगार्ड को सुरक्षा के लिए रख लिया था जो हमेशा साथ रहते थे। करीब दो माह पहले बॉडीगार्ड का राइफल के साथ जब वीडियो वायरल हो गया तो उन्होंने बॉडीगार्ड को हटा दिया था। सोचते थे कि यहां लंबे समय से रह रहे हैं और कहीं कोई परेशानी नहीं हुई तो अब क्या होगा। लेकिन पता नहीं था कि एक जमीन को देखकर लौटने के दौरान ही उनकी हत्या हो जाएगी। वरुण चौधरी की हत्या के बाद से दहशत का माहौल इधर वरुण चौधरी की हत्या के बाद शहर के अन्य जमीन कारोबारी में दहशत का माहौल है। बीते करीब दो वर्षों में नागदह के आसपास ही तीन जमीन कारोबारी की दिनदहाड़े हत्या हो चुकी है। बदमाशों ने 31 जनवरी 2024 को बाघी गांव के रहने वाले जमीन ब्रोकर अमित कुमार को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया था, जिसकी इलाज के दौरान पटना में मौत हो गई। वहीं 11 फरवरी 2025 को नागदह और बाघी के बीच जमीन कारोबारी विद्यानंद महतो की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। 14 जुलाई 2025 को बाघा रेलवे गुमटी के नजदीक जमीन कारोबारी और बैरियर संचालक अमित कुमार की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। अब वरुण चौधरी की हत्या से जमीन ब्रोकरों में दहशत का माहौल है कि पता नहीं अगला नंबर किसका होगा। वहीं, सूरजभान सिंह के पिता वरुण चौधरी की हत्या के बाद लोग घात-प्रतिघात की आशंका से सहमे हुए हैं। फिलहाल इस मामले में मृतक के छोटे पुत्र ने साजिश के तहत हत्या करने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिसमें एक साजिशकर्ता सहित चार लोगों को नामजद किया गया है। जेल से साजिश रचने का आरोप FIR में निर्मल उर्फ सूरजभान ने कहा है कि हम अपने चचेरे भाई राजन कुमार के साथ एक बाइक से एवं मेरे पिताजी वरुण चौधरी दूसरी बाइक से रेलवे गुमटी के पास स्थित नागदह हल्का के राजस्व कर्मचारी के कार्यालय से मिलकर वापस लौट रहे थे। गुमटी पार करने के बाद पीछे से पल्सर बाइक पर सवार राजीव साह, ललन महतो और चंदन साह तेजी से आया और तीनमुहानी के समीप अपने-अपने हाथ में लिए पिस्टल से मेरे पिता गोली चलाने लगा। मेरे वहां पहुंचते ही तीनों अनवर चौक की ओर भाग गए। हम पिताजी के पास पहुंचे तो वह खून से लथपथ गिरे पड़े थे। इसके बाद अपने घर फोन करके गाड़ी बुलाया और डॉक्टर के पास ले गए तो मृत घोषित कर दिया गया। हत्या के समय राजीव साह बाइक चला रहा था, जबकि ललन महतो बीच में और चंदन साह पीछे बैठा हुआ था। निर्मल का कहना है कि बेगूसराय जेल में बंद सजायफ्ता अपराधी भगवानपुर थाना के ताजपुर निवासी संतोष चौधरी ने 5 मार्च को मेरे पिता को फोन करके जान से मारने की धमकी दी थी। उसी ने अन्य लोगों की मिलीभगत से सुनियोजित योजना के तहत षड्यंत्र रचकर मेरे पिता की हत्या गोली मरवाकर कराई है। बेगूसराय में सोमवार को दिनदहाड़े मारे गए जमीन ब्रोकर (कारोबारी) वरुण चौधरी उर्फ वरुण सिंह का अंतिम संस्कार सिमरिया गंगा घाट पर मंगलवार को कर दिया गया। वरुण चौधरी के बड़े बेटे आशीष उर्फ सोनू ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए। एफआईआर के अनुसार छोटे बेटे निर्मल उर्फ सूरजभान के सामने अपराधियों ने वरुण को गोली मारी थी। वरुण पहले बॉडीगार्ड के साथ चलते थे, पर दो महीने पहले उन्होंने बॉडीगार्ड को हटाया था। घटना को लेकर वरुण चौधरी के परिजन में काफी आक्रोश है। वहीं, पुलिस वारदात के बाद से हर पहलू पर नजर रख रही है। मामले की जांच, फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। एक नामजद समेत 2 संदिग्ध को उठाकर पूछताछ की जा रही है। दोनों संदिग्ध नागदह मोहल्ला के रहने वाले हैं, जिसमें एक का घर घटनास्थल के बिल्कुल करीब है। हालांकि दो लोगों को हिरासत में लिए जाने के संबंध में पुलिस अभी कुछ नहीं बता रही है। पुलिस का कहना है कि घटना में शामिल अपराधियों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी सहित अन्य कार्रवाई चल रही है। हत्या क्यों हुई यह अभी जांच का विषय है और जल्द ही इस मामले का खुलासा हो जाएगा। जमीन ब्रोकर की हत्या का मामला क्या है? हत्या क्यों की गई? किसने की? परिवार और पुलिस का वारदात को लेकर क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले हत्या की वारदात के बारे में जानिए बदमाशों ने सोमवार को दिनदहाड़े कपस्या मोहल्ले में करीब 25 वर्षों से घर बना कर रह रहे डंडारी थाना क्षेत्र के मेहां गांव के रहने वाले स्व. गिरिजानंदन चौधरी के सबसे छोटे पुत्र वरुण चौधरी (52 वर्ष) को दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला था। वरुण चौधरी को कुल चार गोली लगी, जिसमें से पोस्टमार्टम के दौरान दो गोली निकली गई, जबकि दो खोखा पुलिस ने घटनास्थल से बरामद किया था। घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी में पूरी घटना कैद हो गई है, जिसमें स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि एक बाइक पर सवार तीन युवक भाग रहे हैं। बाइक चला रहे युवक ने मुंह नहीं ढंका था, जबकि बीच में बैठे युवक ने अपना मुंह छिपा रखा था। जबकि पीछे बैठा युवक बगैर मुंह ढके हुए था और उसके हाथ में पिस्टल था। संभावना जताई जा रही है कि पीछे बैठे युवक ने नागदह की ओर से कपस्या लौट रहे वरुण चौधरी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। अब सीसीटीवी की दो तस्वीरें देखें… 20 मिनट से अधिक समय तक सड़क पर तड़पते रहे वरुण चौधरी दिनदहाड़े 49 नंबर ढ़ाला के आगे तीनमुहानी पर वरुण चौधरी को गोली मारने के बाद हत्यारे भाग गए। ताबड़तोड़ गोली चलता देख आसपास के लोग घर में छुप गए और 20 मिनट से अधिक समय तक वरुण चौधरी सड़क पर तड़पते रहे। बाद में उनके पुत्र छोटे बेटे निर्मल उर्फ छोटू उर्फ सूरजभान सिंह को जब घटना की जानकारी मिली तो वह अपनी गाड़ी लेकर आया और तड़प रहे पिता को उठाकर गोली का इलाज करने के लिए प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचा। जहां डॉक्टरों ने वरुण चौधरी को सदर अस्पताल रेफर कर दिया। सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने वरुण चौधरी को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस हत्या की वजहों को लेकर स्पष्ट नहीं, कहा- जमीन के कारोबार में मर्डर की आशंका फिलहाल, पुलिस इस मामले में सिर्फ इतना बता रही है कि जमीन के कारोबार में ब्रोकर वरुण चौधरी की हत्या होने की आशंका है। लेकिन स्थानीय स्तर पर स्पष्ट हो चुका है कि वरुण चौधरी की हत्या का कारण सिर्फ और सिर्फ जमीन का कारोबार ही है। दरअसल, बेगूसराय शहर के नागदह, पचंबा और आसपास की जमीन शहरीकरण के कारण जब मंहगी हो गई तो अलग-अलग तरह के छोटे कारोबार में जुटे लोग जमीन ब्रोकिंग के धंधे में आ गए। अपने गांव में संदिग्ध गतिविधि में शामिल वरुण चौधरी भी जब गांव छोड़कर बेगूसराय आए तो उन्होंने जमीन ब्रोकिंग को अपना धंधा बनाया। जमीन ब्रोकिंग से उन्होंने 50 करोड़ से भी अधिक की संपत्ति हासिल बनाया। लेकिन वरुण चौधरी का बढ़ता कारोबार आसपास के जमीन ब्रोकरों को पसंद नहीं था। वे लोग नहीं चाहते थे कि कोई बाहर से आकर यहां भारी पैमाने पर जमीन की कारोबार करे और इसीलिए वरुण चौधरी को मार दिया गया है। अब जानिए, वरुण चौधरी की हत्या में किसका हाथ? चर्चा है कि मारने में किसी अन्य का नहीं, बल्कि उन्हीं लोगों का हाथ है जिनकी पहले वरुण चौधरी से दोस्ती थी। जमीन कारोबार के कारण दोस्ती दुश्मनी में बदली और फिर दुश्मनी दोस्ती में बदल गई जो हत्या का कारण बना। सूत्रों की मानें तो नागदह के रहने वाले पशुपति साह की 50 से 60 बीघा जमीन था। इस जमीन की बिक्री को लेकर कई भू-माफिया सक्रिय हुए और उस जमीन के चक्कर में 10 से अधिक लोगों की बीते 10 वर्षों में हत्या हो चुकी है। पशुपति साह की जमीन कई दबंग जमीन ब्रोकर बेचते थे। लेकिन वरुण चौधरी कि उनसे अधिक बन गई और सबसे अधिक जमीन वरुण चौधरी ने बेचा जो शहर के ब्रोकरों को पसंद नहीं था। जमीन कारोबार की इस विवाद में वरुण चौधरी ने जहां अलका सिनेमा हॉल के पीछे तीन कट्ठा जमीन में चार मंजिला आलीशान घर बनवाया तो अपने गांव मेहां में भी 50 से 60 बीघा जमीन खरीदा, साथ में तीन-चार लग्जरी गाड़ी भी खरीदी। बड़े बेटे आशीष को पढ़ा लिखा कर इंजीनियर बनाया जो नोएडा में इंजीनियरिंग करता है। जबकि छोटा बेटा निर्मल उर्फ सूरजभान अपने पिता के साथ ही रहता था। वरुण चौधरी की बढ़ती कमाई से इसके कई दुश्मन पैदा हुए। इस बीच विभिन्न विवाद को लेकर उन पर 10 से अधिक मामले भी दर्ज हुए, लेकिन ठोस सबूत और गवाह नहीं रहने के कारण वरुण सभी मुकदमे में बरी होते चले गए। बाहुबली अनंत सिंह तक था वरुण चौधरी का नेटवर्क इस दौरान उनका नेटवर्क बेगूसराय से आगे बढ़कर अनंत सिंह तक पहुंच गया। हाल के दिनों में वरुण चौधरी का बेटा सूरजभान जब सक्रिय हुआ तो उसकी अनंत सिंह से काफी नजदीक हो गई। वह काले रंग की लग्जरी गाड़ी में चलता था। लेकिन वरुण चौधरी हमेशा सीधे-साधे वेशभूषा में रहते और अपाची बाइक से हेलमेट लगाकर ही चलते थे। सोमवार को उन्होंने यूको बैंक से कुछ पैसा निकाला और एक मित्र से दो लाख लिए थे। इसके बाद नागदह के नजदीक 27 कट्ठा जमीन का महदा कराने जमीन मालिक को एडवांस देने के लिए गए थे। वहां से घर लौटने के दौरान जैसे 49 नंबर गुमटी पार कर तीनमुहानी के पास पहुंचे की दोपहर करीब 1:20 बजे साथ बाइक सवार तीन बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोली मार दी। गोली लगते ही वरुण चौधरी गिरे और हेलमेट खुलकर दूर फेंका गया। वरुण चौधरी के गिरने के बाद एक ई-रिक्शा चालक वहां पहुंचा। लेकिन वह भी डर से नजदीक नहीं गया और ई रिक्शा मोड़ कर वापस लौट गया। वहीं कुछ लोग देखते रहे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। कहा जा रहा है कि अपराध जगत में सक्रिय लोग जब जमीन, शराब और स्मैक के कारोबार में शामिल हुए तो यह लोग लंबे समय से वरुण चौधरी को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे। लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। अपने ऊपर खतरा को देखते हुए उन्होंने आधुनिक राइफल से लैस दो निजी बॉडीगार्ड को सुरक्षा के लिए रख लिया था जो हमेशा साथ रहते थे। करीब दो माह पहले बॉडीगार्ड का राइफल के साथ जब वीडियो वायरल हो गया तो उन्होंने बॉडीगार्ड को हटा दिया था। सोचते थे कि यहां लंबे समय से रह रहे हैं और कहीं कोई परेशानी नहीं हुई तो अब क्या होगा। लेकिन पता नहीं था कि एक जमीन को देखकर लौटने के दौरान ही उनकी हत्या हो जाएगी। वरुण चौधरी की हत्या के बाद से दहशत का माहौल इधर वरुण चौधरी की हत्या के बाद शहर के अन्य जमीन कारोबारी में दहशत का माहौल है। बीते करीब दो वर्षों में नागदह के आसपास ही तीन जमीन कारोबारी की दिनदहाड़े हत्या हो चुकी है। बदमाशों ने 31 जनवरी 2024 को बाघी गांव के रहने वाले जमीन ब्रोकर अमित कुमार को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया था, जिसकी इलाज के दौरान पटना में मौत हो गई। वहीं 11 फरवरी 2025 को नागदह और बाघी के बीच जमीन कारोबारी विद्यानंद महतो की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। 14 जुलाई 2025 को बाघा रेलवे गुमटी के नजदीक जमीन कारोबारी और बैरियर संचालक अमित कुमार की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। अब वरुण चौधरी की हत्या से जमीन ब्रोकरों में दहशत का माहौल है कि पता नहीं अगला नंबर किसका होगा। वहीं, सूरजभान सिंह के पिता वरुण चौधरी की हत्या के बाद लोग घात-प्रतिघात की आशंका से सहमे हुए हैं। फिलहाल इस मामले में मृतक के छोटे पुत्र ने साजिश के तहत हत्या करने की प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिसमें एक साजिशकर्ता सहित चार लोगों को नामजद किया गया है। जेल से साजिश रचने का आरोप FIR में निर्मल उर्फ सूरजभान ने कहा है कि हम अपने चचेरे भाई राजन कुमार के साथ एक बाइक से एवं मेरे पिताजी वरुण चौधरी दूसरी बाइक से रेलवे गुमटी के पास स्थित नागदह हल्का के राजस्व कर्मचारी के कार्यालय से मिलकर वापस लौट रहे थे। गुमटी पार करने के बाद पीछे से पल्सर बाइक पर सवार राजीव साह, ललन महतो और चंदन साह तेजी से आया और तीनमुहानी के समीप अपने-अपने हाथ में लिए पिस्टल से मेरे पिता गोली चलाने लगा। मेरे वहां पहुंचते ही तीनों अनवर चौक की ओर भाग गए। हम पिताजी के पास पहुंचे तो वह खून से लथपथ गिरे पड़े थे। इसके बाद अपने घर फोन करके गाड़ी बुलाया और डॉक्टर के पास ले गए तो मृत घोषित कर दिया गया। हत्या के समय राजीव साह बाइक चला रहा था, जबकि ललन महतो बीच में और चंदन साह पीछे बैठा हुआ था। निर्मल का कहना है कि बेगूसराय जेल में बंद सजायफ्ता अपराधी भगवानपुर थाना के ताजपुर निवासी संतोष चौधरी ने 5 मार्च को मेरे पिता को फोन करके जान से मारने की धमकी दी थी। उसी ने अन्य लोगों की मिलीभगत से सुनियोजित योजना के तहत षड्यंत्र रचकर मेरे पिता की हत्या गोली मरवाकर कराई है।


