ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) का 26वां दिन है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि इस युद्ध में अमेरिका (United States Of America) की जीत हो गई है। इसके साथ ही उन्होंने युद्ध खत्म करने के लिए ईरान को 15 मांगों वाला शांति प्रस्ताव भेजा है। ईरान ने भी युद्ध खत्म करने के लिए अपनी मांगें रख दी हैं। हालांकि ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि ट्रंप पहले भी दो बार उन्हें धोखा दे चुके हैं और ऐसे में उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा नहीं है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिका और ईरान में जल्द ही इस सिलसिले में मीटिंग हो सकती है। इसी बीच पूर्व ब्रिटिश मंत्री एलन डंकन (Alan Duncan) ने एक बड़ा बयान दे दिया है।
क्या कहा डंकन ने?
ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध पर पूर्व ब्रिटिश मंत्री डंकन ने बड़ा बयान दिया है। डंकन ने बताया कि ईरान में परमाणु प्रसार को पूरी तरह रोकने के लिए ओमान (Oman) की मध्यस्थता से एक स्पष्ट शांति समझौता हुआ था, लेकिन इज़रायल ने इसे नाकाम कर दिया और धोखा दिया क्योंकि वो हमेशा से ईरान पर हमला करना चाहता था। इस युद्ध की शुरुआत इज़रायल ने ही की थी।”
ओमान शुरू से युद्ध के खिलाफ
ओमान शुरू से ही इस युद्ध के खिलाफ है। यह युद्ध न हो, इसके लिए ओमान ने हर संभव कोशिश की। अमेरिका और ईरान से बातचीत भी की, क्योंकि ओमान के दोनों देशों से अच्छे संबंध हैं। युद्ध से पहले ओमान के विदेश मंत्री बदर बिन हमद अल बुसैदी (Badr bin Hamad Al Busaidi) ने पुष्टि की थी कि अमेरिका से तीसरे दौर की बातचीत के दौरान ईरान ने सहमति जताई थी कि वो कभी भी परमाणु हथियार और परमाणु हथियार बनाने वाला सामान नहीं रखेगा। बुसैदी ने यह भी कहा था कि ईरान ने ‘ज़ीरो स्टॉकपाइलिंग’ पर सहमति जताते हुए संवर्धित यूरेनियम का कोई भंडारण न रखने को भी ग्रीन सिग्नल दे दिया था। इसके बावजूद भी जब युद्ध शुरू हुआ, तो बुसैदी काफी निराश हुए थे।
इज़रायल के हमले जारी
ईरान के खिलाफ अभी भी इज़रायल के हमले जारी हैं। युद्ध खत्म करने के ट्रंप का इज़रायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को राज़ी करना ज़रूरी है।


