बरेली के चर्चित बवाल प्रकरण में चश्मदीद गवाह को कथित तौर पर सुपारी देकर रास्ते से हटाने की साजिश के मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। आरोपी द्वारा एफआईआर रद्द कराने की कोशिश उस समय विफल हो गई, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका उसके वकील ने वापस ले ली। इसे जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। यह मामला 26 सितंबर 2025 को हुए बवाल से संबंधित है। इसमें स्थानीय निवासी फिरदौस खां ने पुलिस की कार्रवाई में सहयोग किया था और कई मुकदमों में गवाही दी थी। शिकायत के अनुसार, इसी कारण मुख्य बवाल आरोपी और तत्कालीन पार्षद अनीस सकलैनी उनसे रंजिश रखने लगा। बाद में गवाह को धमकाने और उसकी हत्या की साजिश रचने का आरोप सामने आया। मामले का नया पहलू यह है कि गवाही देने वाले व्यक्तियों पर दबाव बनाने के लिए कथित तौर पर आपराधिक नेटवर्क का उपयोग किया गया। शिकायत में बताया गया कि जेल में बंद आरोपी ने अपने बाहरी सहयोगियों के माध्यम से यह साजिश रची। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने सुपारी किलर गैंग से जुड़े एक बदमाश को पहले ही जेल भेज दिया है। मुख्य आरोपी मोहम्मद साजिद सकलैनी ने एफआईआर रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के बाद, बचाव पक्ष ने स्वयं याचिका वापस ले ली। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को चुनौती देना संभव नहीं होता। उत्तर प्रदेश पुलिस की टीमें अब नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश की तैयारी कर रही हैं। विवेचना अधिकारी कॉल डिटेल, लोकेशन लिंक और आपराधिक नेटवर्क कनेक्शन खंगाल रहे हैं।


