- सर्वार्थ सिद्धि और श्रवण नक्षत्र की साक्षी में मनेगा शिव-पार्वती के मिलन का पर्व
- हरणी महादेव और तिलस्वां में गूंजेंगे बम-बम के जयकारे
- दिन में अभिषेक और रात के चारों प्रहर होगी विशेष पूजा
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाएगा। शिव-शक्ति के मिलन के महापर्व पर इस बार ग्रहों की ऐसी चाल बन रही है, जो भक्तों के लिए विशेष फलदायी होगी। लंबे अंतराल के बाद एक साथ 10 प्रकार के दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह महासंयोग सभी राशि के जातकों के लिए श्रेष्ठ साबित होगा। विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं के लिए यह दिन मनचाहा जीवन साथी प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है। शहर के निकटवर्ती प्रसिद्ध आस्था धाम हरणी महादेव, पुर के अधर शिला, पातोला महादेव, तिलस्वां महादेव और त्रिवेणी संगम पर मेले भरेंगे, जहाँ सुबह से ही भक्तों की कतारें लगेंगी।
सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी पूजा
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी शाम 5:34 बजे तक रहेगी। उदया तिथि और निशिथ काल की प्रधानता को देखते हुए महाशिवरात्रि 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 7 बजे से शाम 7:48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। साथ ही उत्तराषाढ़ा व श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग, दिनभर व्यतीपात योग, अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल इस दिन को सिद्धिदायक बना रहे हैं।
भोलेनाथ को ऐसे करें प्रसन्न
पंडित अशोक व्यास के अनुसार शिव को प्रसन्न करने के लिए सही विधि से अर्पण करना आवश्यक है। शिवलिंग पर 11 बिल्व पत्र अर्पित करें। भोलेनाथ के प्रिय भोग धतूरा और भांग चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है। शमी के 7 फूल अर्पित करने से शनि दोषों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति की मान्यता है।
कब करें अभिषेक
महाशिवरात्रि पर रात के चारों प्रहर में पूजा का विशेष महत्व है। हालांकि, सामान्य अभिषेक का शुभ मुहूर्त सुबह 8:24 से दोपहर 12:35 बजे तक श्रेष्ठ रहेगा।
- प्रहर समय
- पहला प्रहर शाम 6:11 से रात 9:22 बजे तक
- दूसरा प्रहर रात 9:23 से 12:34 बजे तक
- तीसरा प्रहर रात 12:35 से तड़के 3:46 बजे तक
- चौथा प्रहर तड़के 3:47 से सुबह 7:15 बजे तक


