आजमगढ़ की तपोभूमि के नाम से प्रसिद्ध दुर्वासा धाम पर महाशिवरात्रि के अवसर पर महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया गया। दो दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का समापन 16 फरवरी को पूजन हवन के साथ किया जाएगा। महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतर्गत दुर्वासा धाम पर कन्या पूजन, शिवलिंग पूजन, ब्राह्मण पूजन, भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक, मां तमसा आरती, अखंड रामायण का पाठ और शिव बारात निकाली जाती है। इसके साथ ही महाशिवरात्रि के अवसर पर विगत 26 वर्षों से संजय कुमार अपनी पत्नी के साथ शिव पार्वती के रूप में विवाह करते हैं। इस विवाह को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्ति शामिल होते हैं। इस विवाह के माध्यम से भगवान शिव पार्वती के विवाह का मंचन किया जाता है। यही कारण है की बड़ी संख्या में भक्त इस विवाह समारोह में शामिल होकर पुष्प वर्षा करते हैं। 26 वर्षों से परंपरा का किया जा रहा है निर्वहन
आजमगढ़ के दुर्वासा धाम पर महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन करने वाले दुर्वेशानंद उर्फ संजय कुमार सिंह का कहना है कि विगत 26 वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर दो दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस महाशिवरात्रि महोत्सव के आयोजन का मुख्य मकसद जनमानस का कल्याण करना है। महाशिवरात्रि महोत्सव में कन्या पूजन पार्थिव पूजन दीप महोत्सव और अखंड मानस पाठ का भी आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही रात्रि में भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया जाता है। जिससे देश, समाज और मानव का उत्थान हो सके। इसके साथ ही जीवन को सफल बनाने के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक जीवन को सफल करने के लिए यह कर्म किया जा रहा है। जिससे लोगों में धर्म के प्रति जागरूकता आए। इसके साथ ही इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देना चाहता हूं कि यह जीवन प्रेममय है। एक दूसरे को इस सृष्टि में प्रेम के साथ जीना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष 26 वर्षों से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर आचार्य महामंडलेश्वर रमाशंकर चतुर्वेदी, बाबा रामलाल मौनी जी महाराज, शुभम दास, अशोक पांडे, बालकृष्ण चतुर्वेदी, उमाशंकर गिरी, यज्ञेश सिंह, ऋषि दुर्वासा दत्तात्रेय आश्रम विकास समिति के बलराम तिवारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


