महाराष्ट्र के नागपुर स्थित विधान भवन में 14 और 15 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय पर्यावरणीय युवा संसद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए शिव सागर ने सरकार की विकास नीतियों पर गंभीर और तथ्यपूर्ण सवाल उठाए। उन्हें विपक्षी सांसद की भूमिका सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने प्रभावी ढंग से निभाया। शिव सागर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मारवाड़ी महाविद्यालय, भागलपुर में राजनीतिक विज्ञान के छात्र हैं। वे भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड के निवासी हैं और छात्र जीवन से ही सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों में सक्रिय रहे हैं। युवा संसद को संबोधित करते हुए शिव सागर ने कहा कि देश की सत्ता तक पहुंचने का मार्ग बिहार से होकर गुजरता है, लेकिन विकास की प्राथमिकताओं में यह राज्य अक्सर उपेक्षित रह जाता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असमानता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अपने वक्तव्य में उन्होंने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों का उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि जिस तरह नालंदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जीवित किया गया, उसी प्रकार विक्रमशिला की उपेक्षा समाप्त कर उसे भी वैश्विक पहचान दिलाई जानी चाहिए। उन्होंने इस विषय पर सरकार से नैतिक जवाबदेही की मांग की। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बोलते हुए शिव सागर ने वैश्विक मंच COP-30 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब तक बिहार के किसानों की समस्याओं, जैसे उत्तर बिहार में बाढ़ और दक्षिण बिहार में सूखे, को नीति निर्माण के केंद्र में नहीं रखा जाएगा, तब तक जलवायु परिवर्तन पर की जाने वाली चर्चा अधूरी रहेगी। अपने संबोधन के अंत में शिव सागर ने आग्रह किया कि विकास के प्रयास केवल चुनावी दौरों तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस और समावेशी हों। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को सहभागी बनाकर ही विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है। युवा संसद में मौजूद प्रतिभागियों ने उनके विचारों की सराहना की। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित विधान भवन में 14 और 15 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय पर्यावरणीय युवा संसद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए शिव सागर ने सरकार की विकास नीतियों पर गंभीर और तथ्यपूर्ण सवाल उठाए। उन्हें विपक्षी सांसद की भूमिका सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने प्रभावी ढंग से निभाया। शिव सागर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मारवाड़ी महाविद्यालय, भागलपुर में राजनीतिक विज्ञान के छात्र हैं। वे भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड के निवासी हैं और छात्र जीवन से ही सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों में सक्रिय रहे हैं। युवा संसद को संबोधित करते हुए शिव सागर ने कहा कि देश की सत्ता तक पहुंचने का मार्ग बिहार से होकर गुजरता है, लेकिन विकास की प्राथमिकताओं में यह राज्य अक्सर उपेक्षित रह जाता है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असमानता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। अपने वक्तव्य में उन्होंने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों का उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि जिस तरह नालंदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जीवित किया गया, उसी प्रकार विक्रमशिला की उपेक्षा समाप्त कर उसे भी वैश्विक पहचान दिलाई जानी चाहिए। उन्होंने इस विषय पर सरकार से नैतिक जवाबदेही की मांग की। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बोलते हुए शिव सागर ने वैश्विक मंच COP-30 का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब तक बिहार के किसानों की समस्याओं, जैसे उत्तर बिहार में बाढ़ और दक्षिण बिहार में सूखे, को नीति निर्माण के केंद्र में नहीं रखा जाएगा, तब तक जलवायु परिवर्तन पर की जाने वाली चर्चा अधूरी रहेगी। अपने संबोधन के अंत में शिव सागर ने आग्रह किया कि विकास के प्रयास केवल चुनावी दौरों तक सीमित न रहें, बल्कि ठोस और समावेशी हों। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को सहभागी बनाकर ही विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकता है। युवा संसद में मौजूद प्रतिभागियों ने उनके विचारों की सराहना की।


