शतचंडी महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न:वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यजमानों ने दी आहुति, कन्या पूजन भी हुआ

शतचंडी महायज्ञ पूर्णाहुति के साथ संपन्न:वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यजमानों ने दी आहुति, कन्या पूजन भी हुआ

गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड स्थित पीतांबरा पीठ मंदिर प्रांगण में 19 मार्च से चल रहा नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ आज वैदिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हो गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठा। यज्ञ के अंतिम दिन विद्वान ब्राह्मणों के नेतृत्व में यजमानों ने हवन कुंड में आहुति डाली। मंत्रोच्चार की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। पं. शिवानंद परमहंस के नेतृत्व में बनारस और स्थानीय विद्वान पंडितों की देखरेख में यह अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसी के साथ, चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि के अवसर पर मंदिर परिसर में कन्या पूजन का भी आयोजन किया गया। इस दौरान कन्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूपों के रूप में पूजा गया। यजमानों और श्रद्धालुओं ने कन्याओं के पैर पखारे, उन्हें चुनरी ओढ़ाकर तिलक लगाया। पूजन के बाद कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया और उपहार व दक्षिणा देकर विदा किया गया। बता दें कि 19 मार्च को कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस महायज्ञ में प्रतिदिन प्रवचन, भजन और भंडारे का आयोजन होता रहा। समापन के अवसर पर एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान मेले जैसा दृश्य होने के कारण सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी के स्वयंसेवक तत्पर दिखे। मां पीतांबरा पीठ के इस अनुष्ठान ने धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। भक्तों ने अगले वर्ष पुनः ऐसे आयोजन की कामना की। गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड स्थित पीतांबरा पीठ मंदिर प्रांगण में 19 मार्च से चल रहा नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ आज वैदिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हो गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंज उठा। यज्ञ के अंतिम दिन विद्वान ब्राह्मणों के नेतृत्व में यजमानों ने हवन कुंड में आहुति डाली। मंत्रोच्चार की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। पं. शिवानंद परमहंस के नेतृत्व में बनारस और स्थानीय विद्वान पंडितों की देखरेख में यह अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसी के साथ, चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि के अवसर पर मंदिर परिसर में कन्या पूजन का भी आयोजन किया गया। इस दौरान कन्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूपों के रूप में पूजा गया। यजमानों और श्रद्धालुओं ने कन्याओं के पैर पखारे, उन्हें चुनरी ओढ़ाकर तिलक लगाया। पूजन के बाद कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया और उपहार व दक्षिणा देकर विदा किया गया। बता दें कि 19 मार्च को कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस महायज्ञ में प्रतिदिन प्रवचन, भजन और भंडारे का आयोजन होता रहा। समापन के अवसर पर एक विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान मेले जैसा दृश्य होने के कारण सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी के स्वयंसेवक तत्पर दिखे। मां पीतांबरा पीठ के इस अनुष्ठान ने धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश दिया। भक्तों ने अगले वर्ष पुनः ऐसे आयोजन की कामना की।  

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