Global Tension और Crude Oil की आग में झुलसा Share Market, लगातार छठे हफ्ते बड़ी गिरावट दर्ज

Global Tension और Crude Oil की आग में झुलसा Share Market, लगातार छठे हफ्ते बड़ी गिरावट दर्ज
भारतीय शेयर बाजार में लगातार छठे हफ्ते भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। हफ्ते के आखिर में थोड़ी रिकवरी जरूर देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। बता दें कि वैश्विक अनिश्चितताओं और लगातार बिकवाली के चलते बाजार की दिशा कमजोर बनी हुई हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार प्रमुख सूचकांक निफ्टी पचास हफ्ते के अंत में करीब बाईस हजार सात सौ तेरह के आसपास बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि बाजार में खरीदारी की स्थायी ताकत अभी नजर नहीं आ रही, जिससे ट्रेंड कमजोर बना हुआ हैं।
हफ्ते के दौरान एक अहम पहलू यह रहा कि बीच में तेज गिरावट के बाद बाजार में इंट्राडे रिकवरी देखने को मिली, जिसे शॉर्ट कवरिंग का असर माना जा रहा हैं। इसके पीछे भारतीय रुपये में आई मजबूती भी एक कारण रही, जो हफ्ते की शुरुआत में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था और बाद में संभला हैं।
हालांकि व्यापक आर्थिक माहौल अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ हैं। बता दें कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया हैं, जो भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए चिंता का विषय बना हुआ हैं। तेल महंगा होने से महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ने का खतरा रहता हैं।
सेक्टर के स्तर पर मिलाजुला रुख देखने को मिला, जहां सूचना प्रौद्योगिकी और धातु क्षेत्र में कुछ मजबूती रही, वहीं दवा और उपभोक्ता टिकाऊ सामान क्षेत्र दबाव में रहे हैं। इससे साफ है कि बाजार में अभी व्यापक स्तर पर संतुलन नहीं बन पाया हैं।
गौरतलब है कि एक बड़े निजी बैंक के तिमाही अपडेट में कारोबार स्थिर होने के संकेत मिले, लेकिन इसे बड़ा ट्रिगर नहीं माना जा रहा है। तकनीकी नजरिए से यह शेयर लंबे समय के औसत स्तर से नीचे फिसल चुका है, जिससे कमजोरी का संकेत मिल रहा है, हालांकि ओवरसोल्ड स्थिति के चलते अल्पकालिक उछाल संभव बताया जा रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार विदेशी निवेशकों ने भी लगातार बिकवाली जारी रखी हैं, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ हैं। हालांकि हाल के दिनों में बिकवाली की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर पड़ी है।
आने वाले हफ्ते में निवेशकों की नजर कई अहम घटनाओं पर रहेगी, जिसमें अमेरिका के महंगाई आंकड़े और भारत में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति बैठक शामिल हैं। बता दें कि ब्याज दरों को लेकर किसी भी संकेत का सीधा असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

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