रायबरेली। अपने धर्म युद्ध की शुरुआत बनारस से लेकर लखनऊ तक करने वाले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द महाराज बीते एक दिन पहले रायबरेली पहुंचे। उन्होंने रात्रि विश्राम के बाद आज सुबह लगभग 7:45 बजे मीडिया से बात की। इससे पहले सूर्यास्त के बाद शंकराचार्य ने मौन धारण कर लिया था और मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया था। मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने बताया कि धर्म युद्ध की शुरुआत बनारस से शंखनाद के साथ हुई थी और यह लखनऊ तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार से गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग 40 दिनों के भीतर की गई थी। 38 दिन बीत चुके हैं और अब केवल दो दिन बचे हैं, जिसके बाद लखनऊ में अगला कदम उठाया जाएगा। सरकार पर सनातन धर्म के नाम पर छलावा करने का आरोप शंकराचार्य ने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता ने गौ माता की रक्षा के लिए कई सरकारों को वोट दिया था। वर्तमान सरकार ने भी सनातन धर्म के नाम पर गौ रक्षा कानून लाने का वादा किया था, लेकिन नौ साल बीत जाने के बावजूद यह कानून लागू नहीं हुआ। उनका कहना था कि यह साबित करता है कि सनातन धर्म के नाम पर केवल छलावा किया जा रहा है। गौ रक्षा कानून की मांग दबाई जा रही है शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि गौ रक्षा कानून की मांग सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म के अनुयायियों की मांग है। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक द्वारा बटुको के सम्मान के बाद की गई टिप्पणियों पर उन्होंने भविष्य में कार्रवाई की मांग की थी, न कि तत्काल कार्रवाई हुई। सत्ता और विपक्ष पर टिप्पणी शंकराचार्य ने कहा कि यदि आप सत्ता पक्ष में हैं और ऐसी बातें करते हैं, तो आप सनातन धर्म के विरोधी माने जाएंगे। वहीं विपक्ष में होने पर वह भी जवाब देने की स्थिति में होते। उनका कहना था कि यह मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि सनातन धर्म से जुड़ा है और इसमें शामिल होने वाले केवल सनातनी होने चाहिए। सनातनी धर्म की शुद्धता पर जोर उन्होंने कहा कि सच्चे सनातनी होने का प्रमाण एक दिन में दिया जा सकता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया को 40 दिन का समय देकर सनातनी होने का साक्ष्य देने को कहा, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। शंकराचार्य ने कहा कि अगर आप सच्चे सनातनी हैं तो प्रमाण देकर वापस आएं।


