शकील अहमद बोले, राहुल गांधी डरपोक पॉलीटिशियन हैं:कहा- वे मजबूत कांग्रेसियों से खतरा महसूस करते हैं, उन्हें सिर्फ बॉस वाली फीलिंग चाहिए

शकील अहमद बोले, राहुल गांधी डरपोक पॉलीटिशियन हैं:कहा- वे मजबूत कांग्रेसियों से खतरा महसूस करते हैं, उन्हें सिर्फ बॉस वाली फीलिंग चाहिए

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे चुके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने राहुल गांधी को लेकर एक बड़ी बात कही है। उन्होंने राहुल गांधी को एक डरपोक पॉलिटिशियन बताया है और कहा कि वह मजबूत कांग्रेसियों से डरते हैं। उन्हें बॉस वाली फीलिंग चाहिए। राहुल गांधी मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी केवल उनके परिवार की है। डॉ. शकील अहमद के इस बयान से सियासत में सरगर्मी है। सोनिया गांधी की कांग्रेस को राहुल गांधी अपना नहीं बना पाए डॉ. शकील अहमद ने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए शशि थरूर को वोट देना चाहता था, लेकिन जब मैंने देखा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के वफादार खरगे जी के लिए वोट मांगें जा रहे हैं, तो मैंने अपनी इच्छा के विरुद्ध खरगे साहब को वोट दिया, क्योंकि मैं अपना वोट बर्बाद नहीं करना चाहता था। मैं सोनिया गांधी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उन्होंने राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी के कांग्रेस का समावेश अपने कांग्रेस में कर लिया। मगर बदकिस्मती से राहुल गांधी सोनिया गांधी की कांग्रेस को भी अपना कांग्रेस नहीं बना पाए। राहुल गांधी लोकप्रिय नेता को खतरा मानते हैं सोनिया गांधी प्रेसिडेंट रहते हुए देश भर के कांग्रेस नेताओं से मिलतीं थीं। उनसे राय मशवरा करके उनका विचार जानतीं थीं। मगर राहुल गांधी सिर्फ फिल्टर्ड लोगों से मिलते हैं। पिछले 5 वर्षों में मैंने राहुल गांधी से मिलने का समय नहीं निकाला क्योंकि मैं उनसे निराश था। राहुल गांधी मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी केवल उनके परिवार की है। राहुल गांधी लोकप्रिय नेताओं से कभी नहीं मिलते क्योंकि उन्हें उनसे खतरा महसूस होता है। दूसरी पार्टी से आए लोग कांग्रेस के महत्वपूर्ण पद पर हैं, क्योंकि उनकी पार्टी में पकड़ नहीं है और राहुल गांधी कभी भी उनको उखाड़ कर फेंक सकते हैं। कांग्रेस में कोई इंटरनल डेमोक्रेसी नहीं उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस में कोई इंटरनल डेमोक्रेसी नहीं है, जो राहुल गांधी ने कह दिया वही कानून है। राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को साथ रखा है, ताकि पुराने लोगों को रिप्लेस करके यहां से नेता ला सके। राहुल गांधी से कैंडीडेट्स डरे रहते हैं। उन्हें यह डर सताता है कि राहुल गांधी क्या बोल देंगे कि उसे संभालते संभालते पूरा इलेक्शन निकल जाए। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे चुके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने राहुल गांधी को लेकर एक बड़ी बात कही है। उन्होंने राहुल गांधी को एक डरपोक पॉलिटिशियन बताया है और कहा कि वह मजबूत कांग्रेसियों से डरते हैं। उन्हें बॉस वाली फीलिंग चाहिए। राहुल गांधी मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी केवल उनके परिवार की है। डॉ. शकील अहमद के इस बयान से सियासत में सरगर्मी है। सोनिया गांधी की कांग्रेस को राहुल गांधी अपना नहीं बना पाए डॉ. शकील अहमद ने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए शशि थरूर को वोट देना चाहता था, लेकिन जब मैंने देखा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी के वफादार खरगे जी के लिए वोट मांगें जा रहे हैं, तो मैंने अपनी इच्छा के विरुद्ध खरगे साहब को वोट दिया, क्योंकि मैं अपना वोट बर्बाद नहीं करना चाहता था। मैं सोनिया गांधी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उन्होंने राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, सीताराम केसरी के कांग्रेस का समावेश अपने कांग्रेस में कर लिया। मगर बदकिस्मती से राहुल गांधी सोनिया गांधी की कांग्रेस को भी अपना कांग्रेस नहीं बना पाए। राहुल गांधी लोकप्रिय नेता को खतरा मानते हैं सोनिया गांधी प्रेसिडेंट रहते हुए देश भर के कांग्रेस नेताओं से मिलतीं थीं। उनसे राय मशवरा करके उनका विचार जानतीं थीं। मगर राहुल गांधी सिर्फ फिल्टर्ड लोगों से मिलते हैं। पिछले 5 वर्षों में मैंने राहुल गांधी से मिलने का समय नहीं निकाला क्योंकि मैं उनसे निराश था। राहुल गांधी मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी केवल उनके परिवार की है। राहुल गांधी लोकप्रिय नेताओं से कभी नहीं मिलते क्योंकि उन्हें उनसे खतरा महसूस होता है। दूसरी पार्टी से आए लोग कांग्रेस के महत्वपूर्ण पद पर हैं, क्योंकि उनकी पार्टी में पकड़ नहीं है और राहुल गांधी कभी भी उनको उखाड़ कर फेंक सकते हैं। कांग्रेस में कोई इंटरनल डेमोक्रेसी नहीं उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस में कोई इंटरनल डेमोक्रेसी नहीं है, जो राहुल गांधी ने कह दिया वही कानून है। राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई को साथ रखा है, ताकि पुराने लोगों को रिप्लेस करके यहां से नेता ला सके। राहुल गांधी से कैंडीडेट्स डरे रहते हैं। उन्हें यह डर सताता है कि राहुल गांधी क्या बोल देंगे कि उसे संभालते संभालते पूरा इलेक्शन निकल जाए।  

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