शहपुरा विधायक बोले- अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ें:प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में कहा- मंत्री बना तो लागू करूंगा नियम, नहीं मानने पर प्रमोशन रुकेगा

शहपुरा विधायक बोले- अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ें:प्रवेश उत्सव कार्यक्रम में कहा- मंत्री बना तो लागू करूंगा नियम, नहीं मानने पर प्रमोशन रुकेगा

डिंडौरी जिले के शहपुरा स्थित संदीपनी स्कूल में बुधवार को आयोजित ‘शाला प्रवेश उत्सव’ कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक ओम प्रकाश धुर्वे ने अधिकारियों पर निशाना साधा। मंच से अधिकारियों को संबोधित करते हुए विधायक ने कहा कि यदि उन्हें भविष्य में कैबिनेट में जगह मिली, तो वे ऐसा नियम बनाएंगे जिसके तहत सरकारी अधिकारियों के बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही पढ़ना होगा। ऐसा न करने वाले अधिकारियों का प्रमोशन रोक दिया जाएगा। मंच पर मौजूद थे कलेक्टर और एसडीएम विधायक धुर्वे ने यह बयान उस समय दिया जब मंच पर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया, एसडीएम ऐश्वर्य वर्मा, जनपद अध्यक्ष प्रियंका आर्मो और नपा अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल उपस्थित थीं। उन्होंने निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों की शिक्षा पद्धति की सराहना की और कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद शासकीय स्कूलों के छात्र बेहतर परिणाम दे रहे हैं। पांचवीं बोर्ड में डिंडौरी के प्रदर्शन की सराहना विधायक ने जिले के शैक्षणिक स्तर पर संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि हाल ही में घोषित कक्षा पांचवीं के बोर्ड परीक्षा परिणामों में डिंडौरी जिला पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय जिले के शिक्षकों की मेहनत को दिया और कहा कि यह साबित करता है कि सरकारी स्कूलों में प्रतिभा की कमी नहीं है। कलेक्टर बोलीं- ‘मैं भी सरकारी स्कूल की उपज’ कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने विधायक की बात का समर्थन करते हुए अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा भी शासकीय स्कूल में ही हुई है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे समय की पाबंदी का ध्यान रखें और बच्चों के भविष्य को गढ़ने में इसी तरह समर्पण दिखाएं। कलेक्टर ने जिले के पांचवीं में द्वितीय और आठवीं में तृतीय स्थान प्राप्त करने पर पूरी टीम को बधाई दी। शिक्षकों को समय पर स्कूल आने की हिदायत कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने नए सत्र के बच्चों का स्वागत किया। विधायक धुर्वे ने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें, ताकि ग्रामीण अंचल के बच्चों को जिला मुख्यालय या निजी स्कूलों की ओर न भागना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा में समानता तभी आएगी जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सरकारी तंत्र पर भरोसा दिखाएंगे।

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