इंदौर की साईं कृपा कॉलोनी में 300 फीट से ज्यादा गहरे बोरिंग के पानी में खतरनाक ई-कोलाई मिलने से हड़कंप मच गया है। सीवेज के पानी में पनपने वाले इस बैक्टीरिया का इतनी गहराई में पहुंचना बड़े खतरे का संकेत है। लैब रिपोर्ट में दो बोरिंग के सैंपल फेल होने के बाद रविवार को रहवासियों ने एक्सपर्ट के साथ मौके पर पड़ताल की। फरवरी के आखिरी हफ्ते से कॉलोनी के कई बोरवेल मटमैला, काले रंग का और बदबूदार पानी दे रहे थे। रहवासियों ने भूजल व पेयजल सुरक्षा विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा को बुलाया। निरीक्षण में सामने आया कि कॉलोनी में दो खाली भूखंडों पर सालों से सीवर और ड्रेनेज का पानी जमा हो रहा था। प्लॉट मालिक ने सफाई करवाकर हाल ही में पास (करीब 30-40 फीट दूर) 320 फीट से ज्यादा गहरा नया बोरवेल खुदवाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी ड्रिलिंग के रास्ते जमा सीवर का पानी रिसता हुआ 300 फीट के नीचे वाले एक्वीफर तक पहुंच गया और वहां फैल गया। भास्कर एक्सपर्ट – सुधींद्र मोहन शर्मा, भूजल व पेयजल सुरक्षा विशेषज्ञ कम गहराई वाले बोरवेल फिलहाल सुरक्षित
भूजल व पेयजल सुरक्षा विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना ‘डेक्कन ट्रैप के बेसाल्ट’ की है, जिसमें अलग-अलग गहराई पर एक्वीफर मौजूद हैं। जांच में साफ हुआ है कि जो बोरवेल 320 फीट से ज्यादा गहरे हैं, सिर्फ उन्हीं से दूषित पानी आ रहा है। जबकि 300 फीट से कम गहराई वाले बोरवेल अभी सुरक्षित हैं। शर्मा के मुताबिक, गहरे एक्वीफर के दूषित होने का मतलब है कि उस स्तर के सभी बोरवेल प्रभावित हो सकते हैं, जिससे पूरे इलाके में पेयजल संकट और स्वास्थ्य का खतरा बढ़ गया है। 15 साल पुराने बोरिंग से आ रही बदबू
साईं कृपा रहवासी संघ के निवासी वीरेंद्र सिंह तोमर, दीपेश गुप्ता, आलोक शाह, गोपाल जांगिड़ आदि के ट्यूबवेल में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। तोमर ने बताया, हमारे यहां 15 साल से ज्यादा पुराने बोरिंग हैं। कुछ दिनों से उनमें गंदा और बदबूदार पानी आने लगा था। फरवरी में एक खाली प्लॉट पर नया बोरिंग हुआ था। हमें शंका हुई कि उसके कारण दिक्कत हुई है, इसलिए हमने पानी की जांच करवाई। क्या है ई-कोलाई: यह एक खतरनाक बैक्टीरिया है जो मुख्य रूप से इंसानों व जानवरों की आंतों (मल) में पाया जाता है।
शुरुआती लक्षण: ई-कोलाई से दूषित पानी पीने से पेट में तेज दर्द, मरोड़, उल्टी, बुखार और डायरिया (कई बार खून वाले दस्त) जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं।
सबसे ज्यादा खतरा किसे: बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए यह सबसे ज्यादा खतरनाक है। संक्रमण गंभीर होने पर यह सीधे किडनी पर असर डालता है। एक्सपर्ट ने सुझाए 5 जरूरी कदम
खाली प्लॉट पर जमा सीवर के पानी को तुरंत हटाकर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) तक पहुंचाया जाए।
{सीवर लाइन में लीकेज के स्रोत का पता लगाकर उसे तत्काल रोका जाए।
जिस नए बोरवेल के कारण पानी नीचे उतरा है, उसके आसपास सीमेंट से सीलिंग (पैकिंग) की जाए।
जो बोरवेल प्रभावित हो चुके हैं, उनसे लगातार पंपिंग कर पानी बाहर निकाला जाए ताकि जलस्तर का शुद्धिकरण हो सके।
कॉलोनी के सभी बोरवेल के पानी की लैब में विस्तृत जांच करवाई जाए।


