MP में कड़ाके की सर्दी…मंदसौर में टेम्परेचर 2.5°C:बर्फीली हवा से बढ़ी ठिठुरन; शहडोल समेत 5 जिलों में कोल्ड वेव का अलर्ट

MP में कड़ाके की सर्दी…मंदसौर में टेम्परेचर 2.5°C:बर्फीली हवा से बढ़ी ठिठुरन; शहडोल समेत 5 जिलों में कोल्ड वेव का अलर्ट

उत्तर से आ रही बर्फीली हवाओं की वजह से मध्यप्रदेश में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। इससे न्यूनतम तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। मंदसौर में इतना कम टेम्प्रेचर रहा। शनिवार सुबह 15 से ज्यादा जिलों में हल्के से मध्यम कोहरा छाया रहा। वहीं, 5 जिले- शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी और मैहर में कोल्ड वेव यानी, शीतलहर का अलर्ट है। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों में बर्फबारी के बाद एमपी में सर्दी बढ़ी है। अगले 2 से 3 दिन तक प्रदेश में तेज ठंड पड़ेगी। 19 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, नए सिस्टम की वजह से प्रदेश में बारिश-बादल वाली स्थिति भी बन सकती है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर-उज्जैन में भी पारा लुढ़का
मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार-शनिवार की रात में कई शहरों में पारे में गिरावट हुई है। मंदसौर सबसे ठंडा रहा। वहीं, कटनी के करौंदी में 2.7 डिग्री, शाजापुर में 3.3 डिग्री, शहडोल के कल्याणपुर में 3.5 डिग्री और प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में पारा 3.8 डिग्री रहा। इसी तरह राजगढ़ में न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया। उमरिया में 5.3 डिग्री, मंडला में 5.6 डिग्री, रीवा में 5.8 डिग्री, मलाजखंड में 6.1 डिग्री, दतिया, रायसेन और नौगांव में तापमान 6.8 डिग्री दर्ज किया गया। बाकी शहरों में भी पारा 10 डिग्री के आसपास ही रहा। बड़े शहरों में ग्वालियर में 5.9 डिग्री, भोपाल में 6 डिग्री, इंदौर में 6.2 डिग्री, उज्जैन में 7.5 डिग्री और जबलपुर में तापमान 8.8 डिग्री दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में सुबह घना कोहरा दर्ज किया गया। यहां विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर तक रही। भोपाल, दतिया, ग्वालियर, सतना, रीवा, खजुराहो में 1 किमी, उज्जैन, रतलाम, इंदौर, नर्मदापुरम, गुना, दमोह, मंडला, नौगांव और सागर में विजिबिलिटी 1 से 2 किलोमीटर तक दर्ज की गई। बाकी कई शहरों में हल्का कोहरा छाया रहा। इसलिए ऐसा मौसम
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम-उत्तर भारत के ऊपर मध्य समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 240 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही है। यह आसमान में नदी की तरह बहने वाली हवा है। जिसका असर एमपी में भी देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, 16 जनवरी से जो वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव हो रहा था, वह आगे बढ़ गया। अब नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस 19 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। यदि यह सिस्टम स्ट्रॉन्ग रहा तो 20-21 जनवरी के बाद प्रदेश में बादल और बारिश वाला मौसम देखने को मिल सकता है। ग्वालियर, चंबल, सागर-रीवा संभाग में घना कोहरा
शनिवार सुबह ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा रहा। वहीं, इंदौर, भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम संभाग के शहरों में भी कोहरे का असर देखने को मिल रहा है। इससे विजिबिलिटी कम है। जिसका असर दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनों पर पड़ रहा है। ट्रेनें निर्धारित समय से लेट हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा असर मालवा, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस में हो रहा है। इसके अलावा पंजाब मेल, जनशताब्दी समेत एक दर्जन ट्रेनें भी प्रभावित हो रही है। इस बार कड़ाके की ठंड का दौर
इस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। ठंड के लिए इसलिए जनवरी खास
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे। MP के 5 बड़े शहरों में जनवरी में ऐसा रहा सर्दी का ट्रेंड… भोपाल में 0.6 डिग्री पहुंच चुका टेम्प्रेचर
भोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। वहीं, दिन में गर्मी का एहसास और बारिश का ट्रेंड भी है। 18 जनवरी 1935 को रात का टेम्प्रेचर रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं, 26 जनवरी 2009 को दिन में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 में से 7 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी। वहीं, सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच बारिश जनवरी 1948 में हुई थी। इंदौर में माइनस 1.1 डिग्री पहुंच चुका पारा
इंदौर में जनवरी में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 में पारा माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 27 जनवरी 1990 को दिन का तापमान 33.9 डिग्री रहा था। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है। इस दिन 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, वर्ष 1920 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4 इंच दर्ज की गई थी। जबलपुर में 1946 में रिकॉर्ड 1.1 डिग्री रहा था पारा
जबलपुर में भी जनवरी में ठंड-बारिश का ट्रेंड है। इस महीने सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम तापमान 33.4 डिग्री 7 जनवरी 1973 को रहा था। इस महीने बारिश भी होती है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 24 जनवरी 1919 को 2.5 इंच हुई थी। इसी साल पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। उत्तरी हवा आने से ग्वालियर सबसे ठंडा
उत्तरी हवाओं की वजह से प्रदेश का ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा रहता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री रहा था। ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती है। साल 2014 से 2024 के बीच 9 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 को है। इस दिन 2.1 इंच पानी गिरा था। वहीं, 1948 को कुल मासिक बारिश 3.1 इंच हुई थी। उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पारा
उज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्प्रेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी।

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