जोधपुर के सात दोस्त दुबई में फंसे थे:बिजनेसमैन गजेंद्र सिंह बोले-जिस होटल के पास घूम रहे थे, उसे टारगेट किया था; दो मिसाइल दागी थी

जोधपुर के सात दोस्त दुबई में फंसे थे:बिजनेसमैन गजेंद्र सिंह बोले-जिस होटल के पास घूम रहे थे, उसे टारगेट किया था; दो मिसाइल दागी थी

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच 28 फरवरी से जंग जारी है। इस दौरान खाड़ी के कई देशों पर भी हमले हुए। जोधपुर से घूमने गए बिजनेसमैन गजेंद्र सिंह महिया सहित 7 दोस्त दुबई में फंस गए। इन हमलों के बीच उन्हें कई दिन तक दुबई में ही रुकना पड़ा। फ्लाइट का दो गुना किराया देकर फ्लाइट से 7 मार्च को अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचे, इसके बाद ये ट्रेन से जोधपुर आए। दुबई के मरीना इलाके में टूरिस्ट के लिए फ्लैट किराए पर मिलते हैं। ये सभी सातों दोस्त भी यहां एक फ्लैट में रुके थे। उनके आसपास तीन बिल्डिंग थी, उनके ऊपर ही ड्रोन और मिसाइल इंटरसेप्ट किए गए। जोधपुर लौटने के बाद इन्होंने दैनिक भास्कर से बात की। गजेंद्र सिंह महिया ने भास्कर से बातचीत में बताया कि 23 फरवरी को अपने 6 दोस्तों के साथ दुबई घूमने के लिए गए थे और 1 मार्च को वापस लौटना था। 27 फरवरी तक लगभग जगह घूम लिए थे। 28 फरवरी अलअरब होटल घूमने के लिए गए। उसके गार्डन एरिया में घूम रहे थे, तभी एक धमाका सुनाई दिया। उन्हें लगा कि पटाखे का तो इतना बड़ा धमाका नहीं हो सकता। तभी खबर मिली कि ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध शुरू हो गया है और ईरान खाड़ी देशों में पर अटैक कर रहा है। इसके बाद उन्हें खबर मिली कि जहां घूम रहे थे, उसी होटल को टारगेट करके दो मिसाइल दागी गई थी। फिर हम वहां से अपने होटल लौट गए। आसमान में आतिशबाजी जैसा नजारा उन्होंने बताया कि रात करीब 12.30 बजे मोबाइल पर इमरजेंसी मैसेज और अलर्ट आया। अलर्ट के साथ मोबाइल साउंड करने लगा, तब सबकी नींद उड़ी तो बाहर बालकनी में जाकर देखा तो ड्रोन और मिसाइल को इंटरसेप्ट कर गिराया जा रहा था और आसमान में आतिशबाजी जैसा नजारा था। फिर सेफ्टी को देखते हुए वापस कमरे में चले गए। बिल्डिंग में होने लगा कंपन गजेंद्र सिंह ने बताया- हमले शुरू होने के बाद लोगों ने मार्केट जाना कम कर दिया था। ट्रैफिक कम था, सरकार ने भी घरों में रहने की सलाह दी। हम जिस फ्लैट में रह रहे थे, उसके ऊपर ही मिसाइल इंटरसेप्ट हो रही थी। एक बार बिल्डिंग के पास में ही ड्रोन इंटरसेप्ट हुआ तो वहां बिल्डिंग में कंपन भी हुआ। जिसके वीडियो बनाकर भी हमने भेजे थे। खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए खाने-पीने के सामान की रेट बढ़ गई थी। होटल फ्री की सुविधा न तो यहां कि सरकार ने की थी और न ही वहां की सरकार ने। वहां की यूएई की लोकल एयरलाइन के यात्री भी फंसे थे, लेकिन उनके पैसेंजर्स को रहने-खाने की फ्री सुविधा की गई थी। हमारी एयरलाइन की तरफ से ये सुविधा नहीं थी। एयर टिकट महंगे मिले उन्होंने बताया कि हमलों के बाद उनकी रिटर्न की फ्लाइट को रिशेड्यूल कर दिया गया था, लेकिन वो कैंसिल हो गई। इसके बाद दुबई से आबूधाबी टैक्सी से गए। वहां से एयर अरेबिया की फ्लाइट पकड़ कर वापस लौटे। सीए लक्ष्मीनारायण बेनीवाल ने बताया कि हमारी फ्लाइट रिशेड्यूल होती रही। जब टिकट मिलने शुरू हुए तो शुरुआत में हमें 37 हजार का टिकट मिला। इसके 5 मिनट बाद में ही टिकट 60, 70 और 80 हजार के होते चले गए। पहले नॉर्मल टिकट 15 हजार तक का था। ऐसी स्थिति में रेट कई गुना बढ़ गए। आबूधामी एयरपोर्ट पर हमले से गिलास टूटे हुए थे। वहीं, ज्ञानेद्र ने बताया कि जब फ्लाइट कैंसिल होने लगी तो एक बार डर लगा कि वापस जाने के लिए फ्लाइट मिलेगी या नहीं। वहां डर का माहौल था, वापस पहुंचने पर खुशी का ठिकाना नहीं रहा। घर पहुंचने पर परिवार वाले भी भावुक हो गए थे। नागौर सांसद ने भी किए प्रयास गजेंद्र ने बताया कि नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने खूब प्रयास किए। एंबेसी में लेटर भेजा, वहां जॉइंट सेक्रेटरी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी फोन किया। जब हमने उन्हें फोन किया तो बोले तुम चिंता मत करो तुम्हें सुरक्षित निकाल लेंगे।

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