बिहारशरीफ नगर निगम ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय के प्रमुख स्रोतों यानी सैरातों की बंदोबस्ती की कवायद शुरू कर दी है। शहर की कुल 13 प्रमुख सैरातों के लिए आगामी 11 मार्च से 13 मार्च तक खुली डाक का आयोजन किया गया है। निगम प्रशासन ने इस बार प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं, जिसके तहत डाक में शामिल होने वाले संवेदकों के लिए चरित्र प्रमाणपत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है। किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बंदोबस्ती प्रक्रिया की बारीकियों और नियमों को स्पष्ट करने के लिए नगर निगम के प्रशासनिक भवन में 9 मार्च को एक ‘प्री-बीड’ बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में इच्छुक डाक कर्ताओं को बंदोबस्ती से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी और शर्तों से अवगत कराया जाएगा। इस बार की नीलामी में रामचंद्रपुर बस स्टैंड, टेंपो परिचालन टॉल टैक्स, कारगिल बस स्टैंड, न्यायालय परिसर के बाहर मोटरसाइकिल स्टैंड और कोसुक मेला जैसे बड़े राजस्व वाले क्षेत्र शामिल हैं। टेंपो टॉल टैक्स से सबसे अधिक मुनाफा आंकड़ों पर नजर डालें तो रामचंद्रपुर बस स्टैंड और टेंपो टॉल टैक्स निगम के लिए सबसे अधिक कमाई वाले केंद्र रहे हैं। पिछले साल रामचंद्रपुर बस स्टैंड की बंदोबस्ती 89 लाख 50 हजार रुपए में हुई थी, जबकि टेंपो परिचालन शुल्क से निगम को 56 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। कचहरी परिसर स्थित मोटरसाइकिल स्टैंड 51 लाख 10 हजार रुपए में किया गया था। जानकारों की मानें तो टेंपो टॉल टैक्स सबसे अधिक मुनाफे वाला सैरात माना जाता है, जिसमें शेयरधारकों की संख्या 10 तक पहुंच जाती है। हालांकि, कारगिल बस पड़ाव की बंदोबस्ती पिछले कई वर्षों से नगर निगम के लिए चुनौती बनी हुई है। लगातार दो दिनों तक खुली डाक आयोजित करने के बावजूद पिछले सालों में किसी भी बंदोबस्तधारी ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। पूर्व में तत्कालीन नगर आयुक्त सौरभ जोरवाल ने एक विशेष रणनीति के तहत रामचंद्रपुर बस स्टैंड की बंदोबस्ती के साथ कारगिल बस पड़ाव को जोड़ दिया था, तब जाकर इसकी बंदोबस्ती संभव हो पाई थी। इस बार भी प्रशासन की नजर इस बात पर टिकी है कि कारगिल बस पड़ाव के लिए कोई स्वतंत्र दावेदार सामने आता है या नहीं। बिहारशरीफ नगर निगम ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आय के प्रमुख स्रोतों यानी सैरातों की बंदोबस्ती की कवायद शुरू कर दी है। शहर की कुल 13 प्रमुख सैरातों के लिए आगामी 11 मार्च से 13 मार्च तक खुली डाक का आयोजन किया गया है। निगम प्रशासन ने इस बार प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं, जिसके तहत डाक में शामिल होने वाले संवेदकों के लिए चरित्र प्रमाणपत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है। किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बंदोबस्ती प्रक्रिया की बारीकियों और नियमों को स्पष्ट करने के लिए नगर निगम के प्रशासनिक भवन में 9 मार्च को एक ‘प्री-बीड’ बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में इच्छुक डाक कर्ताओं को बंदोबस्ती से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी और शर्तों से अवगत कराया जाएगा। इस बार की नीलामी में रामचंद्रपुर बस स्टैंड, टेंपो परिचालन टॉल टैक्स, कारगिल बस स्टैंड, न्यायालय परिसर के बाहर मोटरसाइकिल स्टैंड और कोसुक मेला जैसे बड़े राजस्व वाले क्षेत्र शामिल हैं। टेंपो टॉल टैक्स से सबसे अधिक मुनाफा आंकड़ों पर नजर डालें तो रामचंद्रपुर बस स्टैंड और टेंपो टॉल टैक्स निगम के लिए सबसे अधिक कमाई वाले केंद्र रहे हैं। पिछले साल रामचंद्रपुर बस स्टैंड की बंदोबस्ती 89 लाख 50 हजार रुपए में हुई थी, जबकि टेंपो परिचालन शुल्क से निगम को 56 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। कचहरी परिसर स्थित मोटरसाइकिल स्टैंड 51 लाख 10 हजार रुपए में किया गया था। जानकारों की मानें तो टेंपो टॉल टैक्स सबसे अधिक मुनाफे वाला सैरात माना जाता है, जिसमें शेयरधारकों की संख्या 10 तक पहुंच जाती है। हालांकि, कारगिल बस पड़ाव की बंदोबस्ती पिछले कई वर्षों से नगर निगम के लिए चुनौती बनी हुई है। लगातार दो दिनों तक खुली डाक आयोजित करने के बावजूद पिछले सालों में किसी भी बंदोबस्तधारी ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। पूर्व में तत्कालीन नगर आयुक्त सौरभ जोरवाल ने एक विशेष रणनीति के तहत रामचंद्रपुर बस स्टैंड की बंदोबस्ती के साथ कारगिल बस पड़ाव को जोड़ दिया था, तब जाकर इसकी बंदोबस्ती संभव हो पाई थी। इस बार भी प्रशासन की नजर इस बात पर टिकी है कि कारगिल बस पड़ाव के लिए कोई स्वतंत्र दावेदार सामने आता है या नहीं।


