थानाभवन पुलिस पर भ्रष्टाचार, मारपीट के गंभीर आरोप:पीड़ितों को पीटने और आरोपियों को छोड़ने का मामला सामने आया

शामली जिले के थानाभवन थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कादरगढ़ चौकी और थानाभवन थाना अध्यक्ष पर भ्रष्टाचार, मनमानी और पीड़ितों से दुर्व्यवहार के आरोप लगने के बाद क्षेत्र में आक्रोश और चर्चा तेज है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। पीड़ितों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मुकदमा दर्ज करने में टालमटोल की जाती है और आरोपियों को संरक्षण दिया जाता है। सबसे पहले मामला कादरगढ़ चौकी क्षेत्र से सामने आया, जहां चौकी इंचार्ज दीपचंद पर एक परिवार ने गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित परिवार का कहना है कि कथित रूप से रुपए की मांग पूरी न होने पर पुलिसकर्मी उनके घर में घुसे, मारपीट की और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के बजाय केवल जांच का आश्वासन मिलने से परिवार में नाराजगी है। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों का रवैया सख्त और मनमाना है। हसनपुर लुहारी में चोरी कांड दूसरा मामला कादरगढ़ चौकी क्षेत्र के गांव हसनपुर लुहारी से जुड़ा है। यहां करीब 25 लाख रुपए की चोरी का मामला सामने आया था। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने चोरी का माल बरामद कर लिया, लेकिन आरोपियों को चौकी से ही छोड़ दिया गया। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी तहरीर के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस अधीक्षक एनपी सिंह ने मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। हालांकि, बाद में पीड़ितों ने दोबारा एसपी कार्यालय पहुंचकर आरोप लगाया कि उनकी तहरीर के अनुरूप मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और आरोपियों के नाम शामिल नहीं किए गए। उच्च अधिकारियों पर भी सवाल लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद थाना अध्यक्ष विजेंद्र सिंह रावत का नाम भी चर्चाओं में आ गया है। क्षेत्र में यह सवाल उठ रहा है कि क्या चौकी स्तर पर हो रही कथित अनियमितताओं की जानकारी थाना स्तर तक नहीं पहुंचती? पीड़ितों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। केवल जांच की बात कहकर मामलों को लंबित रखा जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस को पारदर्शी जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लानी चाहिए, ताकि भ्रम और अविश्वास खत्म हो सके। जीरो टॉलरेंस बनाम जमीनी हकीकत प्रदेश सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति की बात कही जाती रही है। लेकिन थानाभवन क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे आरोपों ने जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राउंड पर बातचीत में कुछ ग्रामीणों ने बताया कि वे शिकायत दर्ज कराने से भी हिचकते हैं, क्योंकि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद कम नजर आती है। हालांकि पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि सभी मामलों की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि इन आरोपों की जांच किस दिशा में जाती है और क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाता है या नहीं। फिलहाल, थानाभवन थाना क्षेत्र में पुलिस की साख पर सवाल और राजनीतिक बहस दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

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