बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अधिकारियों द्वारा आरटीआई के जवाब में कथित तौर पर गुमराह करने और सूचना मांगने वाले व्यक्ति पर ही मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने का मामला अब गरमा गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सुरेश कुमार दुबे की अदालत ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर बरेली मंडल को जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने बीएनएसएस की धारा-175 (4) के तहत तथ्यों की स्पष्ट जांच कर 20 मार्च 2026 तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। क्या है पूरा मामला?
सरस्वती नगर निवासी विनोद कुमार जोशी ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उन्होंने बीडीए से एक आर्किटेक्ट, सुमित अग्रवाल की नियुक्ति और उन्हें किए गए करोड़ों के भुगतान के संबंध में सूचना मांगी थी। आरोप है कि बीडीए के जनसूचना अधिकारी ने न केवल अधूरी और भ्रामक जानकारी दी, बल्कि तथ्यों को भी छिपाया।
विनोद जोशी का कहना है कि जब उन्होंने सूचना के लिए दबाव बनाया, तो बीडीए के अधिकारियों ने लोक सेवक के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने के बजाय, उनके खिलाफ ही थाना बिथरी चैनपुर में एफआईआर दर्ज कराने की तहरीर दे दी। पीड़ित ने पुलिस के आला अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग
विनोद जोशी के वरिष्ठ अधिवक्ता लवलेश पाठक ने बताया कि विनोद ने अपनी शिकायत में बीडीए के शीर्ष अधिकारियों को नामजद करते हुए कार्रवाई की मांग की है। इसमें बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मणिकंदन ए., संयुक्त सचिव दीपक वर्मा और अधिशासी अभियंता व जनसूचना अधिकारी अनिल कुमार को विपक्षी बनाया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य अज्ञात कर्मचारियों और वर्दीधारियों पर भी प्रार्थी को धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट का कड़ा रुख: कमिश्नर करेंगे जांच
विनोद जोशी के वरिष्ठ अधिवक्ता लवलेश पाठक ने बताया कि अदालत ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि मामला सीधे तौर पर बड़े प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ा है। न्यायाधीश ने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले के निस्तारण से पहले घटना के तथ्यों और परिस्थितियों की विधिनुसार जांच आवश्यक है। इसके लिए कमिश्नर बरेली मंडल को अधिकृत किया गया है। अदालत का आदेश: “प्रार्थना पत्र में वर्णित घटना के तथ्यों एवं परिस्थितियों की विधिनुसार स्पष्ट जांच आयुक्त बरेली मंडल, बरेली से कराया जाना न्यायोचित है। वे अपनी रिपोर्ट 20 मार्च तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।” आरोपों के मुख्य बिंदु
करोड़ों का भुगतान: आरटीआई के जवाब में बताया गया कि आर्किटेक्ट सुमित अग्रवाल को अब तक 1,47,85,590.06 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। झूठी सूचना: विनोद का दावा है कि प्राधिकरण ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया जो विधि के विरुद्ध है। उत्पीड़न का आरोप: आरोप है कि 10 अगस्त 2025 को अधिकारियों ने बुलाकर धमकी दी कि यदि आरटीआई डालना बंद नहीं किया, तो जेल भिजवा देंगे। अब सबकी नजरें 20 मार्च को आने वाली कमिश्नर की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि बरेली विकास प्राधिकरण के गलियारों में क्या वाकई सूचना के अधिकार को दबाने का खेल चल रहा था।


