धनबाद रेल मंडल में बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीनियर डिविजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (जनरल) संजीव कुमार को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई शुक्रवार शाम शुरू हुई जो देर रात करीब 12 बजे तक चली। सीबीआई की टीम ने उनके कार्यालय के टेबल ड्रॉवर से 50 हजार रुपए नकद बरामद किए, जबकि उनके आवास से करीब 4.50 लाख रुपए भी जब्त किए गए। आईआरएसईई अधिकारी संजीव कुमार पिछले करीब पांच वर्षों से धनबाद रेल मंडल में पदस्थापित थे। इससे पहले सीनियर डीईई (ऑपरेशन) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उनके खिलाफ ठेकेदार एके झा ने सीबीआई से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि धनबाद रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट मरम्मत समेत अन्य कार्यों का करीब 24 लाख रुपए का टेंडर उन्हें मिला था। काम पूरा होने में देरी के कारण विभाग की ओर से जुर्माना लगाया गया। वहीं बिल पास करने में भी लगातार टालमटोल की जा रही थी। आरोप है कि बिल पास कराने के एवज में अधिकारी की ओर से रिश्वत की मांग की जा रही थी। कार्यालय और आवास पर एक साथ छापा शिकायत की जांच के बाद सीबीआई ने योजना बनाकर शुक्रवार शाम सीनियर डीईई (जी) के कार्यालय और आवास पर एक साथ छापेमारी की। इसी दौरान संजीव कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि बेकारबांध मार्ग स्थित पूजा टॉकीज के पास सरकारी आवास के बाहर उन्होंने ठेकेदार से 50 हजार रुपए लिए थे। कार्रवाई के दौरान सीबीआई की टीम ने देर रात लगभग 11:30 बजे तक कार्यालय में जांच-पड़ताल की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले। इस दौरान अधिकारी से लंबी पूछताछ भी की गई। जांच के दौरान टीम ने कार्यालय के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, प्रिंटर समेत अन्य तकनीकी उपकरण और टेंडर से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पहले भी धनबाद रेल मंडल में हो चुकी है कार्रवाई सीबीआई की कार्रवाई की खबर फैलते ही धनबाद रेल मंडल के अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। बताया जाता है कि छापेमारी की सूचना मिलते ही कई अधिकारी अपने-अपने कार्यालय छोड़कर निकल गए। फिलहाल सीबीआई ठेकेदार के कार्यादेश, भुगतान प्रक्रिया और टेंडर से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। गिरफ्तार अधिकारी को आज सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि धनबाद रेल मंडल में इससे पहले भी रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 2013 में रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। जबकि फरवरी 2016 में डीआरएम कार्यालय के चीफ स्टाफ एंड वेलफेयर इंस्पेक्टर पर भी आरोप लगने के बाद गिरफ्तारी हुई थी। इसके अलावा आठ वर्ष पहले आरपीएसएफ के एक कमांडेंट को भी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था। धनबाद रेल मंडल में बिल पास कराने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सीनियर डिविजनल इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (जनरल) संजीव कुमार को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई शुक्रवार शाम शुरू हुई जो देर रात करीब 12 बजे तक चली। सीबीआई की टीम ने उनके कार्यालय के टेबल ड्रॉवर से 50 हजार रुपए नकद बरामद किए, जबकि उनके आवास से करीब 4.50 लाख रुपए भी जब्त किए गए। आईआरएसईई अधिकारी संजीव कुमार पिछले करीब पांच वर्षों से धनबाद रेल मंडल में पदस्थापित थे। इससे पहले सीनियर डीईई (ऑपरेशन) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उनके खिलाफ ठेकेदार एके झा ने सीबीआई से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि धनबाद रेलवे स्टेशन पर लिफ्ट मरम्मत समेत अन्य कार्यों का करीब 24 लाख रुपए का टेंडर उन्हें मिला था। काम पूरा होने में देरी के कारण विभाग की ओर से जुर्माना लगाया गया। वहीं बिल पास करने में भी लगातार टालमटोल की जा रही थी। आरोप है कि बिल पास कराने के एवज में अधिकारी की ओर से रिश्वत की मांग की जा रही थी। कार्यालय और आवास पर एक साथ छापा शिकायत की जांच के बाद सीबीआई ने योजना बनाकर शुक्रवार शाम सीनियर डीईई (जी) के कार्यालय और आवास पर एक साथ छापेमारी की। इसी दौरान संजीव कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि बेकारबांध मार्ग स्थित पूजा टॉकीज के पास सरकारी आवास के बाहर उन्होंने ठेकेदार से 50 हजार रुपए लिए थे। कार्रवाई के दौरान सीबीआई की टीम ने देर रात लगभग 11:30 बजे तक कार्यालय में जांच-पड़ताल की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले। इस दौरान अधिकारी से लंबी पूछताछ भी की गई। जांच के दौरान टीम ने कार्यालय के कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, प्रिंटर समेत अन्य तकनीकी उपकरण और टेंडर से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पहले भी धनबाद रेल मंडल में हो चुकी है कार्रवाई सीबीआई की कार्रवाई की खबर फैलते ही धनबाद रेल मंडल के अधिकारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। बताया जाता है कि छापेमारी की सूचना मिलते ही कई अधिकारी अपने-अपने कार्यालय छोड़कर निकल गए। फिलहाल सीबीआई ठेकेदार के कार्यादेश, भुगतान प्रक्रिया और टेंडर से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। गिरफ्तार अधिकारी को आज सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि धनबाद रेल मंडल में इससे पहले भी रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 2013 में रेलवे के वेलफेयर इंस्पेक्टर को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। जबकि फरवरी 2016 में डीआरएम कार्यालय के चीफ स्टाफ एंड वेलफेयर इंस्पेक्टर पर भी आरोप लगने के बाद गिरफ्तारी हुई थी। इसके अलावा आठ वर्ष पहले आरपीएसएफ के एक कमांडेंट को भी रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था।


