मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में 4 अप्रैल को बिना अनुमति के आंदोलन करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दो छात्र नेताओं पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर इम्तियाज अंजुम के आवेदन के आधार पर सदर थाना में छात्र नेता सौरभ कुमार और नवनीत सम्राट के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 4 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे एबीवीपी के बैनर तले कुछ छात्र-छात्राएं बिना पूर्व अनुमति के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर गए और जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के समक्ष नारेबाजी करते हुए सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न की। सेमिनार में व्यवधान डाल चुके दोनों इस प्रदर्शन का नेतृत्व शोध छात्र सौरभ कुमार और नवनीत सम्राट कर रहे थे। यह भी आरोप है कि दोनों छात्र पूर्व में भी बिना अनुमति के उत्तरी परिसर में आयोजित एक सेमिनार में व्यवधान डाल चुके हैं और लगातार विश्वविद्यालय के नियमों की अनदेखी करते हुए दबाव बनाने का प्रयास करते रहे हैं। सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार ने बताया कि आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है। छात्र नेताओं पर दर्ज मामला वापस लेने की मांग वहीं, इस कार्रवाई को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमे की कड़ी निंदा करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार प्रधानाचार्यों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई कर रहा है, जिससे परिसर में भय का माहौल बन गया है और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। डॉ. शेखर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसे दबाने का प्रयास कर रहा है, जो तानाशाही रवैये को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के अधिकारी शिक्षकों और छात्रों के अभिभावक की भूमिका निभाने के बजाय UMIS कंपनी के संरक्षक की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मुकदमा वापस नहीं लिया गया, तो यूएमआईएस कंपनी और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में 4 अप्रैल को बिना अनुमति के आंदोलन करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के दो छात्र नेताओं पर प्राथमिकी दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर इम्तियाज अंजुम के आवेदन के आधार पर सदर थाना में छात्र नेता सौरभ कुमार और नवनीत सम्राट के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 4 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे एबीवीपी के बैनर तले कुछ छात्र-छात्राएं बिना पूर्व अनुमति के विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर गए और जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के समक्ष नारेबाजी करते हुए सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न की। सेमिनार में व्यवधान डाल चुके दोनों इस प्रदर्शन का नेतृत्व शोध छात्र सौरभ कुमार और नवनीत सम्राट कर रहे थे। यह भी आरोप है कि दोनों छात्र पूर्व में भी बिना अनुमति के उत्तरी परिसर में आयोजित एक सेमिनार में व्यवधान डाल चुके हैं और लगातार विश्वविद्यालय के नियमों की अनदेखी करते हुए दबाव बनाने का प्रयास करते रहे हैं। सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार ने बताया कि आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है। छात्र नेताओं पर दर्ज मामला वापस लेने की मांग वहीं, इस कार्रवाई को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर ने छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमे की कड़ी निंदा करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार प्रधानाचार्यों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई कर रहा है, जिससे परिसर में भय का माहौल बन गया है और शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। डॉ. शेखर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसे दबाने का प्रयास कर रहा है, जो तानाशाही रवैये को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के अधिकारी शिक्षकों और छात्रों के अभिभावक की भूमिका निभाने के बजाय UMIS कंपनी के संरक्षक की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मुकदमा वापस नहीं लिया गया, तो यूएमआईएस कंपनी और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।


