गयाजी खेल परिसर में तीरंदाजी को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह है। एकलव्य राज्य आवासीय तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र के लिए चयन ट्रायल हुआ। जिले के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों खिलाड़ी पहुंचे। हर किसी के चेहरे पर चयन की उम्मीद साफ दिख रही थी। यह ट्रायल मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत आयोजित किया गया। इसमें 12 से 14 साल तक के खिलाड़ियों(बालक-बालिका) ने हिस्सा लिया। शुरुआत में खिलाड़ियों की उम्र के हिसाब से ऊंचाई और वजन मापा गया। इसके बाद असली परीक्षा शुरू हुई। बालक-बालिक वर्ग में खिलाड़ियों ने दिखाया दम खिलाड़ियों को बैटरी टेस्ट से गुजरना पड़ा। इसमें दौड़, लंबी कूद, गोला फेंक जैसे कई शारीरिक टेस्ट लिए गए। मैदान में हर खिलाड़ी ने खुद को साबित करने की पूरी कोशिश की। कोई दौड़ में आगे दिखा तो कोई जंप में दम दिखाता नजर आया। ट्रेनिंग सेंटर पर पूरी सुविधा मिलेगी तीरंदाजी कोच जय प्रकाश ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। ट्रायल का संचालन शिवम भगत और आशुतोष कुमार सिंह की देखरेख में हुआ। सभी खिलाड़ियों का प्रदर्शन बारीकी से देखा गया है। इस बार खास तौर पर 30 बालिकाओं का चयन किया जाना है। चयनित खिलाड़ियों को प्रशिक्षण केंद्र में पूरी सुविधा मिलेगी। रहने-खाने से लेकर पढ़ाई और तीरंदाजी के सभी उपकरण मुफ्त दिए जाएंगे। यानी प्रतिभा को आगे बढ़ाने में किसी तरह की आर्थिक बाधा नहीं आएगी। इस ट्रायल का आयोजन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह सीईओ आईपीएस रविंद्रण शंकरण के निर्देश पर किया गया। तीरंदाजी को लेकर नई उम्मीद अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद गांव-देहात के खिलाड़ियों को मंच देना है, ताकि वे आगे चलकर राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें। कुल मिलाकर, गयाजी में तीरंदाजी को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि इस ट्रायल से निकलकर कौन-कौन से खिलाड़ी आगे बड़ा मुकाम हासिल करते हैं। गयाजी खेल परिसर में तीरंदाजी को लेकर खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह है। एकलव्य राज्य आवासीय तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र के लिए चयन ट्रायल हुआ। जिले के अलग-अलग इलाकों से सैकड़ों खिलाड़ी पहुंचे। हर किसी के चेहरे पर चयन की उम्मीद साफ दिख रही थी। यह ट्रायल मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत आयोजित किया गया। इसमें 12 से 14 साल तक के खिलाड़ियों(बालक-बालिका) ने हिस्सा लिया। शुरुआत में खिलाड़ियों की उम्र के हिसाब से ऊंचाई और वजन मापा गया। इसके बाद असली परीक्षा शुरू हुई। बालक-बालिक वर्ग में खिलाड़ियों ने दिखाया दम खिलाड़ियों को बैटरी टेस्ट से गुजरना पड़ा। इसमें दौड़, लंबी कूद, गोला फेंक जैसे कई शारीरिक टेस्ट लिए गए। मैदान में हर खिलाड़ी ने खुद को साबित करने की पूरी कोशिश की। कोई दौड़ में आगे दिखा तो कोई जंप में दम दिखाता नजर आया। ट्रेनिंग सेंटर पर पूरी सुविधा मिलेगी तीरंदाजी कोच जय प्रकाश ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है। ट्रायल का संचालन शिवम भगत और आशुतोष कुमार सिंह की देखरेख में हुआ। सभी खिलाड़ियों का प्रदर्शन बारीकी से देखा गया है। इस बार खास तौर पर 30 बालिकाओं का चयन किया जाना है। चयनित खिलाड़ियों को प्रशिक्षण केंद्र में पूरी सुविधा मिलेगी। रहने-खाने से लेकर पढ़ाई और तीरंदाजी के सभी उपकरण मुफ्त दिए जाएंगे। यानी प्रतिभा को आगे बढ़ाने में किसी तरह की आर्थिक बाधा नहीं आएगी। इस ट्रायल का आयोजन बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक सह सीईओ आईपीएस रविंद्रण शंकरण के निर्देश पर किया गया। तीरंदाजी को लेकर नई उम्मीद अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का मकसद गांव-देहात के खिलाड़ियों को मंच देना है, ताकि वे आगे चलकर राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें। कुल मिलाकर, गयाजी में तीरंदाजी को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि इस ट्रायल से निकलकर कौन-कौन से खिलाड़ी आगे बड़ा मुकाम हासिल करते हैं।


