डीएम कार्यालय पर माध्यमिक शिक्षकों का धरना, टीईटी से मुक्ति, पुरानी पेंशन बहाली और स्थानांतरण नीति लागू करने की उठाई मांग

डीएम कार्यालय पर माध्यमिक शिक्षकों का धरना, टीईटी से मुक्ति, पुरानी पेंशन बहाली और स्थानांतरण नीति लागू करने की उठाई मांग

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के तत्वावधान में गुरुवार को जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे के नेतृत्व में शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट स्थित पर्यटन भवन परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अपनी लंबित समस्याओं एवं मांगों को लेकर आवाज बुलंद करते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।

टीईटी परीक्षा से पूर्ण रूप से मुक्त किए जाने की मांग

धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों की कई महत्वपूर्ण समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं किया गया है। शिक्षकों ने विशेष रूप से वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूर्ण रूप से मुक्त किए जाने की मांग उठाई। उनका कहना था कि नियुक्ति के समय लागू नियमों के आधार पर कार्यरत शिक्षकों पर बाद में नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

पुरानी पेंशन व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग

संघ के जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे ने कहा कि शिक्षकों की सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना की बहाली है। नई पेंशन योजना से शिक्षकों का भविष्य असुरक्षित हो गया है, जिससे उनमें व्यापक असंतोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार से शिक्षकों के हित में पुरानी पेंशन व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग की।

इसके अलावा शिक्षकों ने स्थानांतरण एवं समायोजन के लिए प्रदेश स्तर पर एक समान एवं पारदर्शी नीति लागू किए जाने की भी मांग की। शिक्षकों का कहना था कि स्पष्ट नीति के अभाव में कई शिक्षकों को वर्षों तक असुविधाजनक स्थानों पर कार्य करना पड़ रहा है।

गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग

धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति दिलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि बीएलओ ड्यूटी सहित अन्य प्रशासनिक कार्यों में शिक्षकों की लगातार तैनाती से शिक्षण कार्य प्रभावित होता है, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

मांगे न मानी गई तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए सरकार तक शिक्षकों की समस्याएं पहुंचाने की मांग की। इस दौरान संघ के पदाधिकारी एवं जनपद के विभिन्न विद्यालयों से आए बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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