विद्वानों ने भारत की पराजय, सुरक्षा पर की चर्चा:’महाराणा’ पुस्तक पर मंथन, भविष्य की रणनीति पर जोर

विद्वानों ने भारत की पराजय, सुरक्षा पर की चर्चा:’महाराणा’ पुस्तक पर मंथन, भविष्य की रणनीति पर जोर

जनपद औरैया के दिबियापुर कस्बे में प्रज्ञा प्रवाह की कानपुर प्रांत इकाई ब्रह्मावर्त परिषद ने एक पुस्तक और विषय परिचर्चा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में डॉ. ओमेंद्र रतनू की बेस्टसेलर पुस्तक ‘महाराणा – सहस्र वर्षों का संघर्ष’ पर चर्चा की गई, साथ ही ‘भारत पराजित क्यों हुआ और वर्तमान में कैसे सुरक्षित रहे’ विषय पर भी गहन मंथन हुआ। नगर पंचायत सभागार में आयोजित इस परिचर्चा की शुरुआत प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत सह संयोजक डॉ. भूपेंद्र प्रताप सिंह ने की। प्रांत संयोजक और लेखक मुनीश त्रिपाठी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। पुस्तक की विषयवस्तु पर विस्तार से बताते हुए डॉ. सुबेंद्र सिंह ने कहा कि मेवाड़ ने कभी हार नहीं मानी और एक हजार वर्षों तक युद्ध किया। डॉ. सुबेंद्र सिंह ने बप्पा रावल से लेकर हम्मीर देव, राणा सांगा और राज सिंह जैसे शासकों का उल्लेख किया, जिन्होंने मुगलों और तुर्कों के आगे घुटने नहीं टेके। उन्होंने उनके प्रेरणादायी इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद राघव ने परिचर्चा की रूपरेखा और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। इसके बाद ‘भारतीय प्राचीन सुरक्षा व्यवस्था में पराजय के कारण और वर्तमान परिस्थिति में भारत कैसे सुरक्षित रहे’ विषय पर सामूहिक चर्चा प्रस्तुत की गई। इस विषय पर डॉ. अतुल मिश्रा, विनीत त्रिपाठी और आचार्य राघवेंद्र शुक्ला ने धार्मिक, तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक आयामों पर विस्तार से चर्चा की। विषय परिचर्चा में विशाल दुबे, रामजी मिश्रा, संदीप शर्मा, कमलेश तिवारी, डॉ. विवेक शर्मा, सुशांत त्रिपाठी, रविंद्र सिंह, रजत दुबे, मनीष यादव, चिंतन दुबे, प्रमोद पाल और कुलदीप पोरवाल सहित कई विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। इतिहासविद प्रोफेसर डॉ. कौशलेन्द्र तिवारी ने कहा कि हमें भारत की पराजय के सभी कारणों पर वर्तमान परिस्थितियों के साथ व्यापक चिंतन करना होगा। उन्होंने तकनीकी पक्ष की अवहेलना न करने पर भी जोर दिया। सफल परिचर्चा संपन्न होने पर जिला संयोजक आशीष मिश्रा ने सभी उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

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