UGC Rules: सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशन पर अंतरिम रोक लगाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यह विवाद सीधे तौर पर कोर्ट के फैसले या UGC के नियमों से जुड़ा नहीं है, बल्कि बिहार पुलिस की एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी शेयर करने के बाद बिहार पुलिस का आधिकारिक X हैंडल सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नियमों पर रोक लगाई
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी, जिनका मकसद शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना था। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर ऐसे नियम बिना व्यापक सलाह-मशविरे के लागू किए जाते हैं, तो इससे समाज में बंटवारा हो सकता है।
बिहार पुलिस की ‘ब्रेकिंग न्यूज’ पोस्ट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद, बिहार पुलिस ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की। पोस्ट में लिखा था, “यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक… ब्रेकिंग: अगर हम दखल नहीं देंगे, तो यह समाज को बांट देगा। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर UGC के इक्विटी रेगुलेशन पर रोक लगाई।” यहीं से सोशल मीडिया पर हंगामा शुरू हुआ। यूजर्स ने इस मामले में बिहार पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाना शुरू कर दिया और पूछा कि क्या पुलिस अब न्यायिक या शैक्षिक नीतियों पर टिप्पणी कर रही है।
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग की बाढ़
पोस्ट वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई। कुछ लोगों ने इसे सूचना साझा करने की पहल बताया, लेकिन बड़ी संख्या में यूजर्स ने बिहार पुलिस के आईटी सेल पर तंज कसे।
एक यूजर ने लिखा, “अब यह कन्फर्म हो गया कि बिहार पुलिस का सोशल मीडिया अकाउंट कोई जनरल कैटेगरी वाला हैंडल कर रहा है।” दूसरे ने व्यंग्य करते हुए कहा, “बिहार पुलिस अब ब्रेकिंग न्यूज़ चैनल बन गई है।”
कई यूजर्स ने सीधे सवाल उठाया कि “क्या बिहार पुलिस भी अब यूजीसी पर पक्ष ले रही है?” वहीं कुछ ने मजाकिया लहजे में पूछा, “बिहार पुलिस का ट्विटर हैक हो गया है क्या?”
कुछ कमेंट्स में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधते हुए लिखा गया, “अब यही काम बचा है, जब अपना असली काम हो नहीं रहा तो रिपोर्टिंग ही कर लो।”
IT सेल की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार पुलिस के सोशल मीडिया संचालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यूजर्स का कहना है कि पुलिस का आधिकारिक हैंडल आमतौर पर कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक अलर्ट या जनहित सूचनाओं के लिए होता है। ऐसे में एक संवेदनशील और नीतिगत मसले पर “ब्रेकिंग न्यूज़” स्टाइल पोस्ट करना कई लोगों को असहज कर गया।
हालांकि कुछ यूजर्स ने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि जनहित में यह सूचना सभी तक पहुंचे, यह प्रयास सराहनीय है। लेकिन ऐसे प्रतिक्रियाएं गिनी-चुनी ही रहीं।
विवादों में UGC के नए नियम
गौरतलब है कि यूजीसी के इन नए नियमों को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है। बिहार सहित पूरे देश में कई नेताओं और छात्र संगठनों ने इन नियमों को लेकर सवाल उठाए थे। कुछ ने इसे “काला कानून” तक कहा था, जबकि कुछ का मानना था कि इसके दुरुपयोग की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


