सरस्वती पूजा में दिखा आस्था और सामाजिक संदेशों का संगम:थीम आधारित पंडालों ने दिखाया समाज का आईना, महिला सशक्तिकरण की मिसाल

सरस्वती पूजा में दिखा आस्था और सामाजिक संदेशों का संगम:थीम आधारित पंडालों ने दिखाया समाज का आईना, महिला सशक्तिकरण की मिसाल

बोकारो में इस वर्ष सरस्वती पूजा आस्था, संस्कृति और रचनात्मकता का भव्य उत्सव रही। शहर भर में स्थापित पंडालों ने न केवल धार्मिक भावनाओं को सशक्त किया, बल्कि सामाजिक संदेशों के माध्यम से भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सेक्टर-4 स्थित मारुति शोरूम मैदान के सामने आयोजित मृणालिका का सपनों की उड़ान संस्था की सरस्वती पूजा बोकारो के प्रमुख आकर्षणों में से एक थी। पिछले नौ वर्षों से यह पूजा पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही है, जो महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। तीन दिवसीय इस आयोजन में सुबह से शाम तक प्रसाद वितरण किया गया। वहीं, शाम को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। पूजा के साथ-साथ यहां एक मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें खाने-पीने सहित विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए, जो बोकारोवासियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा। इस भव्य आयोजन में सेल, प्रशासन, राजनीतिक क्षेत्र और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पहुंचकर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई थी। विशाल और आकर्षक पंडाल, सुंदर मंदिर और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पूजा के मुख्य आकर्षण रहे, जिन्हें देखने के लिए शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। पूरे बोकारो शहर में भी सरस्वती पूजा की धूम देखने को मिली। बच्चों और युवाओं ने अपनी कल्पना और मेहनत से थीम आधारित पंडालों का निर्माण किया। सेक्टर 12/B में जय हिंद युवा क्लब द्वारा “ऑपरेशन सिंदूर” थीम पर भारतीय सेना की वीरता को दर्शाया गया, जिसने देशभक्ति की भावना को जागृत किया। दुंदीबजार के पंजाबी टोला में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता क्रोकोडाइल थीम का पंडाल आकर्षण का केंद्र रहा, जबकि सेक्टर 2/C में लायंस क्लब ने माता-पिता के सम्मान पर आधारित थीम प्रस्तुत की। संक्षेप में, बोकारो में सरस्वती पूजा केवल पूजा और आस्था का पर्व नहीं रही, बल्कि यह समाज को जागरूक करने वाला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक एकता का उत्सव भी साबित हो रहा। बोकारो में इस वर्ष सरस्वती पूजा आस्था, संस्कृति और रचनात्मकता का भव्य उत्सव रही। शहर भर में स्थापित पंडालों ने न केवल धार्मिक भावनाओं को सशक्त किया, बल्कि सामाजिक संदेशों के माध्यम से भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सेक्टर-4 स्थित मारुति शोरूम मैदान के सामने आयोजित मृणालिका का सपनों की उड़ान संस्था की सरस्वती पूजा बोकारो के प्रमुख आकर्षणों में से एक थी। पिछले नौ वर्षों से यह पूजा पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित की जा रही है, जो महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। तीन दिवसीय इस आयोजन में सुबह से शाम तक प्रसाद वितरण किया गया। वहीं, शाम को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। पूजा के साथ-साथ यहां एक मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें खाने-पीने सहित विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए, जो बोकारोवासियों के लिए एक यादगार अनुभव रहा। इस भव्य आयोजन में सेल, प्रशासन, राजनीतिक क्षेत्र और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पहुंचकर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई थी। विशाल और आकर्षक पंडाल, सुंदर मंदिर और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस पूजा के मुख्य आकर्षण रहे, जिन्हें देखने के लिए शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे। पूरे बोकारो शहर में भी सरस्वती पूजा की धूम देखने को मिली। बच्चों और युवाओं ने अपनी कल्पना और मेहनत से थीम आधारित पंडालों का निर्माण किया। सेक्टर 12/B में जय हिंद युवा क्लब द्वारा “ऑपरेशन सिंदूर” थीम पर भारतीय सेना की वीरता को दर्शाया गया, जिसने देशभक्ति की भावना को जागृत किया। दुंदीबजार के पंजाबी टोला में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता क्रोकोडाइल थीम का पंडाल आकर्षण का केंद्र रहा, जबकि सेक्टर 2/C में लायंस क्लब ने माता-पिता के सम्मान पर आधारित थीम प्रस्तुत की। संक्षेप में, बोकारो में सरस्वती पूजा केवल पूजा और आस्था का पर्व नहीं रही, बल्कि यह समाज को जागरूक करने वाला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक एकता का उत्सव भी साबित हो रहा।  

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