सहरसा के बटराहा मोहल्ले में बुधवार को सरस्वती पूजा के अवसर पर कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 151 युवतियों ने भाग लिया, जिसके साथ ही पूजा का विधिवत शुभारंभ हुआ। युवतियां पारंपरिक परिधान में सजकर हाथों में कलश लिए हुए थीं।कलश यात्रा बटराहा मोहल्ले से शुरू होकर शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से गुजरी। इस दौरान “जय मां सरस्वती” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच निकली इस यात्रा को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कलश यात्रा का उद्देश्य मां सरस्वती की आराधना के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, सद्भाव और शिक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश देना है। कलश यात्रा से जुड़ी तस्वीरें… विधि-विधान के साथ प्रतिमा स्थापित
यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें स्थानीय लोगों ने भी सहयोग किया। कलश यात्रा में शामिल युवतियों ने नदी एवं जलाशय से जल भरकर पूजा स्थल पर स्थापित किया। इसके बाद विधि-विधान के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना की गई। पूजा पंडाल को आकर्षक रूप से सजाया गया है, जहां श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा की व्यवस्था की गई है।आयोजन समिति ने जानकारी दी कि पूजा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। समिति ने प्रशासन के डीजे और अश्लील गीतों पर प्रतिबंध के निर्देशों का पालन करते हुए पूजा को शांतिपूर्ण और मर्यादित ढंग से मनाने का निर्णय लिया है। सहरसा के बटराहा मोहल्ले में बुधवार को सरस्वती पूजा के अवसर पर कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 151 युवतियों ने भाग लिया, जिसके साथ ही पूजा का विधिवत शुभारंभ हुआ। युवतियां पारंपरिक परिधान में सजकर हाथों में कलश लिए हुए थीं।कलश यात्रा बटराहा मोहल्ले से शुरू होकर शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से गुजरी। इस दौरान “जय मां सरस्वती” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच निकली इस यात्रा को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कलश यात्रा का उद्देश्य मां सरस्वती की आराधना के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, सद्भाव और शिक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश देना है। कलश यात्रा से जुड़ी तस्वीरें… विधि-विधान के साथ प्रतिमा स्थापित
यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें स्थानीय लोगों ने भी सहयोग किया। कलश यात्रा में शामिल युवतियों ने नदी एवं जलाशय से जल भरकर पूजा स्थल पर स्थापित किया। इसके बाद विधि-विधान के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना की गई। पूजा पंडाल को आकर्षक रूप से सजाया गया है, जहां श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा की व्यवस्था की गई है।आयोजन समिति ने जानकारी दी कि पूजा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। समिति ने प्रशासन के डीजे और अश्लील गीतों पर प्रतिबंध के निर्देशों का पालन करते हुए पूजा को शांतिपूर्ण और मर्यादित ढंग से मनाने का निर्णय लिया है।


