शेखपुरा के बुधौली बाजार स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केंद्र में शुक्रवार देर शाम चैतन्य देवी सरस्वती मां की झांकी सजाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-आरती की और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आकर्षक भक्तिमय संगीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। ब्रह्माकुमारी पूजा बहन ने सभी श्रद्धालुओं का तिलक लगाकर और भोग खिलाकर स्वागत किया। ब्रह्माकुमारी राधिका बहन ने सरस्वती पूजा के दिव्य संदेश को समझाते हुए कहा कि यह समय ज्ञान के सागर में आकर सत्य ज्ञान के द्वारा हंस के समान मोती चुनने का है, जिससे गुणग्रही बनने की सीख मिलती है। उन्होंने बताया कि मां सरस्वती का यह दिव्य स्वरूप हमें मन और बुद्धि को एकाग्र कर परमात्मा के सर्वगुणों और शक्तियों को जीवन में धारण करने का संदेश देता है। अज्ञान को अलग करने का प्रतीक वक्ताओं ने ब्रह्माकुमारी में जीवन के सत्य रहस्यों को समझने और सृष्टि परिवर्तन की इस बेला में अपना श्रेष्ठ भाग्य बनाने की बात कही। माता सरस्वती को हंस वाहिनी, वीणापाणि और मां शारदा भवानी के नाम से भी जाना जाता है। उनकी सवारी हंस पर इसलिए दिखाई जाती है क्योंकि हंस दूध और पानी को अलग कर देता है, जो ज्ञान और अज्ञान को अलग करने का प्रतीक है। मोर को पवित्रता का पक्षी माना जाता है। इस कार्यक्रम में डॉ. रामाश्रय प्रसाद सिंह, डॉ. सुरेश प्रसाद, मुरलीधर मुरारी, शिक्षिका रिंकी कुमारी, बहन रीता और बहन द्रोपदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। शेखपुरा के बुधौली बाजार स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय केंद्र में शुक्रवार देर शाम चैतन्य देवी सरस्वती मां की झांकी सजाई गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजा-आरती की और प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आकर्षक भक्तिमय संगीत पर नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। ब्रह्माकुमारी पूजा बहन ने सभी श्रद्धालुओं का तिलक लगाकर और भोग खिलाकर स्वागत किया। ब्रह्माकुमारी राधिका बहन ने सरस्वती पूजा के दिव्य संदेश को समझाते हुए कहा कि यह समय ज्ञान के सागर में आकर सत्य ज्ञान के द्वारा हंस के समान मोती चुनने का है, जिससे गुणग्रही बनने की सीख मिलती है। उन्होंने बताया कि मां सरस्वती का यह दिव्य स्वरूप हमें मन और बुद्धि को एकाग्र कर परमात्मा के सर्वगुणों और शक्तियों को जीवन में धारण करने का संदेश देता है। अज्ञान को अलग करने का प्रतीक वक्ताओं ने ब्रह्माकुमारी में जीवन के सत्य रहस्यों को समझने और सृष्टि परिवर्तन की इस बेला में अपना श्रेष्ठ भाग्य बनाने की बात कही। माता सरस्वती को हंस वाहिनी, वीणापाणि और मां शारदा भवानी के नाम से भी जाना जाता है। उनकी सवारी हंस पर इसलिए दिखाई जाती है क्योंकि हंस दूध और पानी को अलग कर देता है, जो ज्ञान और अज्ञान को अलग करने का प्रतीक है। मोर को पवित्रता का पक्षी माना जाता है। इस कार्यक्रम में डॉ. रामाश्रय प्रसाद सिंह, डॉ. सुरेश प्रसाद, मुरलीधर मुरारी, शिक्षिका रिंकी कुमारी, बहन रीता और बहन द्रोपदी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


