रोते दिखे संजय निषाद, अखिलेश का तंज— “ये दर्द नहीं, बीजेपी का पछतावा है!” यूपी की सियासत में मचा बवाल

रोते दिखे संजय निषाद, अखिलेश का तंज— “ये दर्द नहीं, बीजेपी का पछतावा है!” यूपी की सियासत में मचा बवाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई। जब कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वे रोते हुए नजर आ रहे हैं। इस पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए इसे भाजपा के साथ जाने का पछतावा बताया।

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक वीडियो ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद का एक भावुक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इस वीडियो में वे सार्वजनिक मंच पर भावुक होकर रोते नजर आ रहे हैं। जिसे लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।

ये आंसू निजी पीड़ा के या फिर भाजपा में जाने का पछतावा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि ये आंसू किसी निजी पीड़ा के हैं। या फिर भाजपा के साथ जाने के फैसले पर पछतावे के। उन्होंने अपने बयान में ‘PDA’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग का भी जिक्र किया। और कहा कि ऐसे घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इन वर्गों के नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

अखिलेश का तंज-हम थे, जिनके सहारे, वो हुए न हमारे

अखिलेश यादव ने एक फिल्मी गाने का जिक्र करते हुए भी तंज कसा। उन्होंने लिखा कि लोगों को ऐसा लग रहा है। जैसे इस वीडियो के पीछे “हम थे जिनके सहारे, वो हुए न हमारे” जैसा गाना चल रहा हो। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि जिन लोगों के भरोसे राजनीति खड़ी की गई। अब वही साथ नहीं दे रहे हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक रणनीति का हिस्सा है। अखिलेश यादव लगातार ‘PDA’ फॉर्मूले को मजबूत करने में लगे हैं। और इस मुद्दे के जरिए वे पिछड़े और कमजोर वर्गों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं।

मंत्री के समर्थक बोले-भावनात्मक क्षण था, वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा

वहीं, डॉ. संजय निषाद के समर्थकों का कहना है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका दावा है कि यह एक भावनात्मक क्षण था। जिसे विपक्ष जानबूझकर राजनीतिक रंग दे रहा है। फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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